केस - एक
आरकेडिया निवासी राजेंद्र सिंह ने घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया। निगम में निर्धारित राशि जमा करने के बाद रसीद थमा कर कह दिया गया कि एक हफ्ते के अंदर कनेक्शन लगा दिया जाएगा। एक हफ्ते से ज्यादा वक्त बीतने पर भी कनेक्शन नहीं लगा तो वह बिजली दफ्तर पहुंचे। वहां बताया गया कि केबल नहीं है। केबल आने के बाद ही कनेक्शन लगेगा। इस पर वह खुद ही बाजार से केबल लाए तो अगले ही दिन उनका कनेक्शन हो पाया।
केस - दो
मुकेश कुमार निवासी बड़ोवाला ने कनेक्शन के लिए पूरा शुल्क निगम में जमा कराया, लेकिन उन्हें भी केबल उपलब्ध न होने की बात कहीं गई। इसके बाद वह भी खुद बाजार से केबल खरीद कर लाए तब जाकर उनके घर में कनेक्शन जोड़ा गया। इसी प्रकार के एक नहीं बल्कि कई मामले हैं, जब लोगों को पैसे जमा करने के बाद भी खुद की केबल लाने पड़ रही है।
आखिर कहां जाती है करोड़ों की केबल?
ऐसा नहीं है कि ऊर्जा की निगम के पास केबल की कमी हो। हर वर्ष निगम की ओर से करोड़ों के केबल की खरीद की जाती है, लेकिन उपभोक्ताओं को केबल देने में आनाकानी की जाती है। सवाल यह भी उठता है कि यह केबल जाती कहां है?
तीन साल में खरीदा गया केबल
वर्ष केबल खरीद किमी में धनराशि
2016 200 किमी 69,24,000
2017 1000 किमी 11,08,3560
2018 1500 किमी 10,23,5600
निगम के सभी सब स्टेशनों पर पर्याप्त मात्रा में केबल उपलब्ध है। आवेदक केबल न मिलने की शिकायत सीधे उनसे कर सकते हैं। वह इस मामले में कार्रवाई करेंगे। फिलहाल उनके संज्ञान में इस प्रकार के शिकायतें नहीं हैं।
- बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक यूपीसीएल