उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के दौरान बागी विधायकों को विधान सभा से बर्खास्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। बागी विधायकों की तरफ से सप्रीम कोर्ट में दायर में कहा गया था कि विधानसभा स्पीकर के पास विधायकों को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की ओर से दायर की गई याचिका पर फाइनल सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। अदालत ने इस केस को स्थगित कर दिया। इस याचिका में कहा गया था कि विस स्पीकर के पास राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा बुलाने और उसे बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा।
बता दें कि पिछले साल उत्तराखंड कांग्रेस सरकार के बागी विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री और हाल में बीजेपी नेता विजय बुहुगुणा के नेतृत्व में स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा उन्हें विधानसभा से बर्खास्त करने के मामले को संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया था। उन्होंने कहा था गोविंद सिंह कुंजवाल अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं और उन्हें इसके लिए दंड मिलना चाहिए।