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उत्तराखंडः सुप्रीम कोर्ट के इस नए फरमान से बागी विधायकों को लगा झटका

Tue, 11 Jul 2017 09:18 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के दौरान बागी विधायकों को विधान सभा से बर्खास्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। बागी विधायकों की तरफ से सप्रीम कोर्ट में दायर में कहा गया था कि विधानसभा स्पीकर के पास विधायकों को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है।
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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की ओर से दायर की गई याचिका पर फाइनल सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। अदालत ने इस केस को स्‍थगित कर दिया। इस याचिका में कहा गया था कि विस ‌स्पीकर के पास राष्ट्रपति शासन के दौरान विधानसभा बुलाने और उसे बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य विधायकों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। 

बता दें कि पिछले साल उत्तराखंड कांग्रेस सरकार के बागी विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री और हाल में बीजेपी नेता विजय बुहुगुणा के नेतृत्व में स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा उन्हें विधानसभा से बर्खास्त करने के मामले को संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया था। उन्होंने कहा था गोविंद सिंह कुंजवाल अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं और उन्हें इसके लिए दंड मिलना चा‌हिए।
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हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था

भाजपा कार्यालय में पहुंचे बागी - फोटो : AmarUjala
बता दें कि कांग्रेस के बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराने वाले नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इससे पहले नैनीताल हाई कोर्ट ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता को अयोग्य बताने वाले विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सही ठहराया ‌था।

उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इन विधायकों की सदस्यता दलबदल कानून के तहत रद्द कर दी थी। विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को इन विधायकों ने नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट के जज यूसी ध्यानी के पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला सोमवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।
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