देश की आजादी के नायक सरदार भगत सिंह को फांसी दिए जाने का मामला एक बार फिर चर्चाओं में है। जिन तीन जजों की पीठ ने तब भगत सिंह केस की सुनवाई की थी, उनके नाम गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार में रखी कोर्ट केस ट्रायल की प्रति पर अंकित हैं।
विवि के पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रखी कोर्ट ट्रायल की इस प्रति में मुकदमा शुरू होने से आरोप तय होने तक की पूरी कार्यवाही 1659 पृष्ठों पर दर्ज है। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के प्रमुख इम्तियाज राशिद कुरैशी की ओर से पाकिस्तान के लाहौर की एक अदालत में याचिका दायर की गई है।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह को निर्दोष साबित करने वाले याचिका पर तीन फरवरी को सुनवाई शुरू हो चुकी है। हालांकि अदालत ने कहा कि इस मामले को पहले तीन जजों की पीठ ने सुना था, लिहाजा अब इस केस को पांच या इससे अधिक जजों की पीठ सुन सकती है। मामला लाहौर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया गया है।
पांच मई 1930 को लाहौर कोर्ट में शुरू हुआ ट्रायल
गौरतलब है कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सहित 18 लोगों पर पांच मई 1930 को लाहौर कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ था। 11 सितंबर 1930 को कोर्ट ने इन पर आरोप तय कर दिए। यहां संग्रहालय के निदेशक डा. प्रभात कुमार ने बताया कि भगत सिंह कोफांसी की सजा सुनाए जाने वाला कोर्ट ट्रायल का हिस्सा गुरुकुल को नहीं दिया गया है।
कोर्ट ट्रायल की प्रति में जजों के नामों का जिक्र आया है। जज जीसी हिल्टन अधिकतर सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। उनके साथ अन्य जज के तौर पर कभी आगा हैदर तो कभी अब्दुल कादिर आदि बदलते रहे। अधिकतर कार्यवाही उर्दू भाषा में दर्ज की गई। यदा-कदा अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग भी किया गया है।
गुरुकुल की याचिका पर भारत आई प्रतिलिपि
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की ओर से 2009 में लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कोर्ट ट्रायल की सत्यापित प्रतिलिपि की मांग की गई थी। विवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. प्रदीप जोशी ने बताया कि लाहौर हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 2009 को सत्यापित प्रतिलिपि विश्वविद्यालय को भेजी थी। प्रतिलिपि के हर पृष्ठ पर लाहौर हाईकोर्ट की मुहर लगी है।
शहीद-ए-आजम पर लगाई गईं धाराएं
धाराएं
302- हत्या का आरोप
120- आपराधिक षड़यंत्र रचना
121- सरकार के खिलाफ युद्ध का षड्यंत्र
109- किसी अपराध के लिए उकसाना
महत्वपूर्ण बिंदु
- पांच मई 1930 को प्रारंभ हुआ कोर्ट ट्रायल
-11 सितंबर 1930 को तय हुआ आरोप
-23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को दी गई फांसी
-1659 पन्नों पर लिखी गई कोर्ट की कार्यवाही