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पढ़िए कैसे, सोशल साइट पर वायरल एक वीडियो ने मां-बेटे को 16 साल बाद मिलाया

Sat, 04 Mar 2017 11:40 AM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
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nari niketan - फोटो : file photo
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कल तक सुभद्रा की पहचान एक गुमनाम, बेसहारा और बीमार वृद्धा की थी। लेकिन, आज वह सुभद्रा पतिर है, जिसका भरापूरा परिवार है। सोशल साइट पर वायरल कराए गए एक वीडियो से हजारों किमी दूर असम के एक छोटे से गांव में सुभद्रा का घर मिला। मां के जिंदा होने की खबर वहां पहुंची तो बेटे दुर्लभ पतिर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 
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उसके लिए ये किसी चमत्कार से कम नहीं था। उसने सोशल साइट पर संदेश भिजवाया, ‘मां मैं तुझे लेने आ रहा हूं।’ सुभद्रा देहरादून के नारी निकेतन की संवासिनी है। वह असम के एक सीमांत गांव की रहने वाली है जहां सोलह साल पहले बाढ़ में उसका घर-बार छूट गया था। भटकते-भटकते वह उत्तराखंड कब पहुंची, इसकी उसे सुध नहीं है।

परिवार से बिछड़ी सुभद्रा दिसंबर 2014 से नारी निकेतन में है। वह तब नई टिहरी में बदहवास हालात में मिली थी। असमी होने की वजह से वह संवाद नहीं कर पाती थी। ‘अमर उजाला’ के खुलासे के बाद नारी निकेतन में चली सुधारों की बयार में कई संवासिनियों की घरवापसी हुई। उस सूची में अब सुभद्रा का नाम भी जुड़ जाएगा। सुभद्रा की जिंदगी का ये ‘टर्निंग प्वांइट’ जितना अप्रत्याशित है, उससे कहीं ज्यादा दिलचस्प उसे उसके परिवार से मिलाने की कहानी है। इस कहानी के सूत्रधार हैं अपर सचिव (समाज कल्याण) मनोज चंद्रन।
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मनोज बताते हैं कि नारी निकेतन से जब सुभद्रा की सहेलियां एक-एक करके घर लौटने लगीं तो उसको भी घर की याद सताने लगी। उसने घर जाने की जिद की। मगर उसकी जुबान कोई समझ नहीं पा रहा था। इतना भर पता चला की वह असम की है। उन्होंने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के असमी शोधार्थी नीरज को बुलाया। 
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जान‌िए किसकी मदद से यह हुआ संभव

nari niketan - फोटो : file photo
नीरज ने सुभद्रा से बात की तो खुलासा हुआ कि वह असम और अरूणाचल के मध्य एक जनजातीय मिसिंग समुदाय की हैं। नीरज ने असम में अपने मित्र रूणा सिंघा से संपर्क साधा। सुभद्रा ने गांव का नाम बंगालीजनलगासुंग बताया तो रूणासिंघा ने वहां की मतदाता सूची खंगाली। गांव के बीएलओ से पूछा। मतदाता सूची में सुभद्रा मर चुकी थी। मगर तलाश थमी नहीं। 

उन्होंने मिसिंग जनजाति छात्रसंघ के नेता रिदीप डोले की मदद ली। देहरादून से सुभद्रा का एक वीडियो तैयार कराया गया, जिसमें वह अपनी पहचान बता रही है। ये वीडियो सोशल साइट पर वायरल हुआ। स्थानीय प्राग न्यूज चैनल में वीडियो पर एक खबर प्रसारित हुई तो संदेश उसके घर तक पहुंच गया। रूणा सिंघा ने सुभद्रा के बेटे दुर्लभ पतिर से भेंट की। दुर्लभ ने भी सोशल साइट पर मां के लिए संदेश भेजा कि वह उसे लेने आ रहा है।  

मां को लेने को बेटा रवाना 
दुर्लभ, मिसिंग ट्राइब स्टूडेंट यूनियन के रिदीप जैक डोले और रूणा सिंघा सुभद्रा को लेने के लिए असम से रवाना हो चुके है। उनके सोमवार तक देहरादून पहुंचने की संभावना है। वे अपर सचिव के निरंतर संपर्क में हैं।

70 संवासिनियों की घरवापसी
प्रदेश में नारी व शिशु निकेतन से करीब 70 संवासिनियों की घरवापसी हो चुकी है। 2016 से अब तक प्रदेश भर से 230 महिला एवं बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचा गया है। इनमें 18 शिशु गोद लिए गए हैं।
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