इसके साथ ही संबंधित विषय के बेरोजगार शिक्षकों को काम मिलेगा। मंत्री ने कहा कि संस्कृत को स्कूलों में पढ़ाए जाने के साथ ही समस्त सरकारी स्कूलों के नाम हिंदी के साथ ही संस्कृत में भी लिखे जाएंगे।
इसके अलावा पंचायत, युवा कल्याण, खेल, विद्यालयी शिक्षा और संस्कृत शिक्षा में बोर्ड लेखन और आमंत्रण पत्र हिंदी के साथ ही संस्कृत में प्रकाशित होंगे। आमंत्रण पत्र में प्रथम पृष्ट पर हिंदी और इसके पिछले पृष्ट पर संस्कृत में आमंत्रण पत्र प्रकाशित होंगे।
संस्कृत को लेकर सरकार की यह सोच अच्छी है, लेकिन हर निजी स्कूल ने किसी न किसी बोर्ड से मान्यता ली है। भाषा सीखने को लेकर बोर्ड की ओर से स्कूलों को गाइड लाइन जारी होती है। इसी के आधार पर बच्चों की परीक्षाएं होती हैं। केवल शासनादेश जारी करने से इसे सभी स्कूलों पर लागू करवा पाना आसान नहीं होगा। शासनादेश के बजाए यदि एनसीईआरटी की ओर से इस तरह के निर्देश होते तो स्कूल इसे गंभीरता से लेते। निजी स्कूल जर्मन, फ्रैंच पढ़ाना अधिक पसंद करते हैं।
- पुष्पा मानस, पूर्व शिक्षा निदेशक