फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बजट के फेर में उलझी संजीवनी बूटी की खोज

Thu, 08 Dec 2016 04:31 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
dronagiri mount
विज्ञापन
जिस संजीवनी बूटी के मिलने का दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञानी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उस बेशकीमती जड़ी की खोज बजट के फेर में लटक गई है।
विज्ञापन


संजीवनी बूटी ढूंढने का सीजन निकल गया है और इसके लिए गठित कमेटी को शासन ने इतना भी बजट नहीं दिया कि विज्ञानी द्रोण पर्वत पर जा सकें। अब संजीवनी की खोज के लिए केंद्र सरकार से 10 करोड़ रुपये बजट मांगा जा रहा है।

ब्रिटेन, जर्मनी, इटली आदि देशों की एजेंसियां हिमालयी जड़ी-बूटियों की खोज और इनकी ताजा स्थिति जानने के लिए रात-दिन एक हुए हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

फूटी कौड़ी भी नहीं मिली

money
वहीं संजीवनी बूटी तलाशने के लिए प्रदेश शासन ने पूर्व जड़ी-बूटी सलाहकार मायाराम उनियाल की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की थी, वह द्रोण पर्वत सिर्फ इसलिए नहीं जा पाई कि उसे फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। प्रदेश शासन से इस मद में सिर्फ 20 लाख रुपये बजट मांगा गया था।

बजट न मिलने से संजीवनी तलाशने का एक सीजन हाथ से निकल गया। अब चमोली जिले की द्रोण घाटी तथा इसके आगे वाले स्थानों पर जहां संजीवनी के मिलने की उम्मीद है, बर्फ की चादर से ढंकने लगे हैं।

मार्च के बाद जब बर्फ पिघलनी शुरू होगी तभी टीम जा सकेगी, लेकिन यह तय नहीं है कि प्रदेश शासन कमेटी को बजट उपलब्ध करा ही देगा। इसके लिए अब केंद्र सरकार से पैसा मांगा जा रहा है। विभाग 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

अपर सचिव आयुष जीबी औली ने बताया कि कमेटी का गठन कर दिया गया है। बजट अभी नहीं मिल पाया है। निदेशक आयुष डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि जाड़े में संजीवनी बूटी के संभावित इलाकों में बर्फ पड़ने लगती है। जाड़े के बाद अब वहां टीम जा पाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें