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संवासिनी मामला: दो डॉक्टर, निदेशक दिल्ली तलब

Sat, 30 Jan 2016 11:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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नारी निकेतन में संवासिनी से दुराचार और मौतों के मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग दो डॉक्टरों और समाज कल्याण विभाग के निदेशक को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब कर चुका है। आयोग की सदस्य के अनुसार पूछताछ में अहम सबूत भी मिले हैं, लेकिन जांच पूरी होने पर ही खुलासा किया जाएगा। लेकिन राज्य महिला आयोग की ओर से तीन दिन पूर्व गठित टीम ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। आयोग में बयान दर्ज किए जाने की निदेशक समाज कल्याण वीएस धानिक ने पुष्टि की है।
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घर जाएगा महिला आयोग
राज्य महिला आयोग की ओर से गठित टीम ने 50 संवासिनियों का डाटा जुटाया है। अब यह टीम इनके घर जाकर संवासिनियों की सुरक्षा की पड़ताल करेगी। अभी राज्य महिला आयोग ने जांच शुरू भी नहीं की लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग अपनी जांच के तहत उत्तराखंड से दो डॉक्टरों और समाज कल्याण विभाग के निदेशक को दिल्ली बुला चुकी है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा ने बताया कि पूछताछ में अहम सबूत भी मिले हैं, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही सबका खुलासा किया जाएगा। बताया कि अभी कई और लोगों को पूछताछ के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग में बुलाया जाएगा।
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ये हैं जांच टीम में
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजिनी कैंतुरा ने बताया कि जांच टीम में वकील आलोक घिल्डियाल, पुलिस अधिकारी ममता बोहरा, आयोग की दो पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी और संतोष चौहान को रखा गया है। आयोग की सचिव सुजाता सिंह भी जांच टीम में रखी गई हैं। बताया कि जांच में सबसे पहले राज्य के बाहर गई संवासिनियों की सुरक्षा को लेकर वहां के डीएम को पत्र लिखा जाएगा जबकि उत्तराखंड में रहने वाली संवासिनियों के घर जाकर टीम खुद उनसे बातचीत करेगी।

जिसने जुटाए साक्ष्य वही बाहर
राज्य महिला आयोग का हाल भी अजब है। जिसने नारी निकेतन में जाकर साक्ष्य जुटाए, उन्हीं को जांच टीम में नहीं रखा गया। सबसे पहले आयोग की उपाध्यक्ष प्रभावती गौड़ ने ही यह साक्ष्य जुटाए थे कि नारी निकेतन से छूटी हुई 25 संवासिनियों का रिकार्ड तक नहीं है। प्रभावती ने राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा के सामने भी यह सारी बातें रखी थी।

उन्होंने मानव तस्करी तक की बातें कही थी। प्रभावती ने कई साक्ष्य जुटाकर जांच रिपोर्ट तैयार की थी। आयोग को चाहिए था कि अपनी इस नई तरह की जांच में पुरानी जांचकर्ता को भी शामिल करते तो काफी मदद मिल जाती। कई जानकारियां जो इन्हें नई लग रही लेकिन उपाध्यक्ष बतातीं कि यह सब कितनी पुरानी हैं।
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