प्रदेश की 18 किलोमीटर लंबी और 1.2 किलोमीटर ऊंचाई वाली यमुना-मसूरी पेयजल योजना के पानी के सैंपल जल संस्थान ने पास कर दिए हैं। शनिवार से इस परियोजना से मसूरी को पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी, जिसके तहत रोजाना दो से चार एमएलडी पानी मसूरीवासियों को मिलेगा।
इंजीनियरों की कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद आखिरकार यमुना से 1.2 किमी ऊंचाई पर पानी पहुंचाने का सपना पूरा हो गया है। इस पेयजल योजना में तीन हजार से ज्यादा ज्वाइंट हैं लेकिन ट्रायल से अब तक कहीं भी लीकेज की समस्या पेश नहीं आई है। पानी तो मसूरी के राधा भवन तक पहले ही पहुंच चुका था लेकिन इसे साफ करने की प्रक्रिया चल रही थी। दो दिन पहले पानी के सैंपल फेल हो गए थे। शुक्रवार को दोबारा सैंपल लिए गए। देर शाम जल संस्थान ने पानी को पेयजल योग्य पाया। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद देर रात से राधा भवन स्थित टैंक में पानी भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। शनिवार से पानी की आपूर्ति शुरू होगी।
आपूर्ति की निगरानी के लिए पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता प्रवीन कुमार राय के नेतृत्व में इंजीनियरों की पूरी टीम ने डेरा डाला हुआ था। शुक्रवार को पेयजल निगम के गढ़वाल चीफ इंजीनियर संजय सिंह भी आपूर्ति की निगरानी को पहुंच गए। उन्होंने सभी अभियंताओं के साथ ही प्रबंध निदेशक, शासन के अधिकारियों के मार्गदर्शन को इस सफलता का कारक मानते हुए बताया कि शनिवार से पेयजल आपूर्ति शुरू होगी। उन्होंने बताया कि परियोजना को पूरी क्षमता से चलाने के लिए दो से तीन माह का समय लगेगा क्योंकि अभी यूपीसीएल की ओर से निर्बाध बिजली आपूर्ति को सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। पेयजल निगम के एमडी उदयराज सिंह ने इस कामयाबी पर सभी इंजीनियरों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि सचिव पेयजल अरविंद सिंह के निर्देश पर पहले ही तय कर लिया गया था कि पेयजल के सैंपल पास होने के बाद ही आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। महज तीन साल में 144 करोड़ की परियोजना से सफलतापूर्वक पानी चढ़ने से मसूरी को 30 साल तक पेयजल की किल्लत नहीं होगी। योजना में चीफ इंजीनियर कुमाऊं सुजीत विकास, एसई डीके बंसल, एसई प्रवीन राय, ईई संदीप कश्यप, जेएस कठैत का भी विशेष योगदान रहा है।
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प्रदेश की पहली इतनी कठिन परियोजना का ट्रायल सफल
प्रदेश में इससे पहले जब भी पेयजल निगम ने लंबी दूरी की पेयजल योजनाएं बनाई हैं, वह ट्रायल स्तर पर ही सिरदर्द बन जाती थी। उनका पाइप फटने से लेकर पंपिंग सेट न चलने तक जैसी समस्याएं आज भी आम हैं। यमुना से मसूरी पेयजल की ऐसी योजना है, जिसका हर ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।