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उद्योगपति समीर थापर-जयंत नंदा समेत 16 को नहीं मिली बेल, फॉरेस्ट एक्ट उल्लंघन में बंद

Wed, 04 Jan 2017 02:55 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, कोटद्वार/देहरादून
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हाई फाई मामले में कोटद्वार कोर्ट में चंडीगढ़ और दिल्ली के वकील जुटे रहे। - फोटो : AmarUjala
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उद्योगपति समीर थापर-जयंत नंदा समेत सभी 16 लोगों की जमानत याचिका मंगलवार को भी खारिज हो गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) भवदीप रावते ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया।
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बचाव पक्ष बुधवार को पौड़ी सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल करेगा। लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में नए साल के जश्न के दौरान वन कानूनों, आर्म्स और आबकारी एक्ट के उल्लंघन के सभी आरोपी फिलहाल पौड़ी जेल में बंद हैं।

इधर, शासन ने कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप में लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ मयंक शेखर झा को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया।

नया साल सेलीब्रेट करने आए थे उत्तराखंड

दीवानी न्यायालय कोटद्वार - फोटो : AmarUjala
आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता राजीव आत्माराम, रनदीप सिंह राय, राजेंद्र सिंह, मनोज गोरकेला और स्थानीय अधिवक्ता अरविंद कुमार वर्मा ने एसीजेएम कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि सभी आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें उक्त मामलों में झूठा फंसाया गया है।

आरोपियों के विरुद्ध ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे उन्हें अपराधी माना जाए। ये लोग बतौर पर्यटक नए साल को सेलीब्रेट करने के लिए परिवार और दोस्तों संग गेस्ट हाउस में रुके थे।

इसके लिए उन्होंने बाकायदा वन विभाग से लिखित में अनुमति हासिल की थी। दिल्ली और चंडीगढ़ के वकीलों ने जमानत के लिए बहस करते हुए कहा कि उनके मुव्वकिलों का कोई भी कृत्य गैरकानूनी नहीं है। फॉरेस्ट एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन तो पुलिस द्वारा किया गया है।

अवैध रूप से हथियार लाने, फॉरेस्ट एक्ट के उल्लंघन का आरोप

सभी आरोपी पौड़ी जेल में बंद हैं। - फोटो : AmarUjala
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी अजीत मिश्रा और नामित अधिवक्ता आशुतोष कंडवाल ने जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध करते हुए कई दलीलें दीं। कहा कि आरोपियों द्वारा आरक्षित वन क्षेत्र में अवैधानिक रूप से लकड़ियां जलाना, अवैध रूप से हथियार और कारतूस ले जाना, बड़ी मात्रा में शराब का बरामद होना, एक व्यक्ति के नाम पर बुकिंग कर बड़ी संख्या में एकत्र होना संदेह पैदा करता है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद इस मामले को बेहद गंभीर बताया। कहा कि यह मामला साधारण नागरिक का नहीं है, बल्कि समाज के ऐसे उद्योगपति वर्ग के लोगों से जुड़ा हुआ है जो फॉरेस्ट एक्ट और वाइल्ड लाइफ से जुड़े कानूनों की भली-भांति जानकारी रखते हैं।

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान समय में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट ने वाइल्ड लाइफ और पर्यावरण के बारे में सख्त गाइड लाइन जारी की है। सलमान खान जैसे बहुचर्चित व्यक्तित्व के लोग वाइल्ड लाइफ से जुड़े मामलों में हाईलाइट हुए हैं। ऐसी परिस्थिति में इस मामले में जमानत दिए जाने का कोई आधार नहीं बनता।

डीएफओ निलंबित, अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी

हाई फाई में मामले में कोर्ट में द‌िनभर गहमागहमी बनी रही। - फोटो : AmarUjala
इधर, निलंबित डीएफओ को फिलहाल प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इस प्रकरण में विभागीय जांच अभी चलती रहेगी। रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड राजेंद्र कुमार ने चीफ कंजर्वेटर शिवालिक वृत्त भुवनचंद्र और कंजर्वेटर मीनाक्षी जोशी को जांच के लिए भेजा था। शुरुआती जांच में अधिकारियों को प्रकरण में वनाधिकारियों की ओर से चूक मिली। इस पर तत्काल प्रभाव से डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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मामले में बारीकी से हो रही जांच

मामले की बारीकी से जांच चल रही है। - फोटो : AmarUjala
अधिकारिक तौर पर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग में इस संबंध में जानकारी दी। वैसे सोमवार को ही चीफ कंजर्वेटर भुवनचंद्र समेत अन्य अधिकारियों के कोल्हूचौड़ पहुंचने के बाद शासन को जो प्रारंभिक जानकारी मिली, उसी वक्त डीएफओ के निलंबन का फैसला कर लिया गया था।

इसे मंगलवार को जारी किया गया। इस प्रकरण में अभी बारीकी से जांच की जा रही है। इस प्रकरण में वन कानूनों का उल्लंघन हुआ है। खासतौर पर वन आरक्षित क्षेत्र में कैंप फायर पाया जाना और बिना अनुमति बंदूक अंदर पहुंचना गंभीर मसला है।
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