डाकपत्थर क्लब द्वितीय में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन बाल व्यास स्वामी रामचंद्राचार्य ने श्रद्धालुओं को संत, सत्संग और सद्ग्रंथ का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मानव को अपने जीवन के उद्धार के लिए इन तीनों का सहारा लेना चाहिए। इससे जीवन में विकार आने की संभावना कम होती है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति कुसंगति में पड़कर अपना जीवन नष्ट कर लेता है, जबकि अच्छी संगति उसे जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। परमात्मा को खोजने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में जब कोई कठिन समस्या आए तो उसे संत के सामने अथवा मंदिर में भगवान के समक्ष रखना चाहिए। संत उसका मार्गदर्शन कर सकते हैं और भगवान उस समस्या को दूर करने में सक्षम हैं। स्वामी रामचंद्राचार्य ने कहा कि पितृ पक्ष में प्रत्येक घर में यज्ञ होना चाहिए। इससे देवता और पितृ दोनों तृप्त होकर परिवार को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष सुबोध गोयल, सचिव कपिल नागपाल, राजेंद्र भारद्वाज, मोतीलाल शर्मा, धीरेंद्र जोशी, शशांक शर्मा, सतेंद्र तिवारी, गजेंद्र बिजल्वाण, भरत सिंह, रमा सक्सेना, माधुरी तिवारी, रुचि द्विवेदी आदि मौजूद रहे।