पुराने मास्टर प्लान में लोगों को कई दिक्कतें
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की तरफ से वर्ष 2041 तक के लिए यह डिजिटल मास्टर प्लान बनाया गया है। यह मास्टर प्लान सैटेलाइट के जरिए तैयार किया गया है। यह मास्टर प्लान साल 2018-19 से ज्योग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम के जरिए तैयार किया जा रहा था। इससे पहले पुराने मास्टर प्लान में लोगों को कई तरह की दिक्कतें आ रही थीं।
मास्टर प्लान में जो स्थितियां दर्शायी गई थीं, उससे उलट धरातल पर निर्माण दिखाई दे रहे थे, अब सैटेलाइट मैपिंग के साथ ही धरातलीय सर्वे के बाद नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इससे पूर्व 2005-2025 तक का मास्टर प्लान प्रभावी रहा है, खामियों के चलते हाईकोर्ट इसे निरस्त कर चुका है और यह सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर चल रहा है। वर्ष 2018-19 से जीआइएस (जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम) आधारित जिस मास्टर प्लान पर एमडीडीए व मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक की टीम माथा-पच्ची कर रही थी, अब यह धरातल पर उतरेगा।
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सजरा क्या होता है?
सजरा किसी गांव के ऐसे नक्शे को कहते हैं, जिसका प्रयोग उस गांव के खेतों या अन्य जमीनों का कानूनी तौर पर स्वामित्व बताने और प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। गांव का सजरा पूरे गांव को जमीन के टुकडों में बांटता है। हर टुकड़े का अपना खसरा नंबर होता है, जिसमें लिखा होता है कि उस खसरे का मालिक कौन है। सजरा एक अरबी शब्द है।
मुख्य ग्राम एवं नगर नियोजक एसएम श्रीवास्तव के मुताबिक, नया मास्टर प्लान सेटेलाइट आधारित है और इसमें सेटेलाइट मैपिंग के साथ ही धरातलीय सर्वे कर सटीक जानकारी एकत्रित की गई है। एमडीडीए आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे लागू कर देगा।