पूर्व में तैनात रहे अधिकारी-कर्मचारियों पर भी गिर सकती है गाज
इस पूरे प्रकरण में अब तक जो महत्वपूर्ण बात सामने आई है, वर्ष 2008 से अब तक पेड़ काटने के मात्र आठ से 10 एच-टू (अपराध पत्र) केस काटे गए। मतलब अवैध कटान का काम तो सालों से हो रहा था, लेकिन वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी आंखें मूंदे रहे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि विस्तृत जांच में अब पूर्व में यहां तैनात रहे अधिकारी-कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
जिनके घर से माल बरामद, उनकी मुश्किलें बढ़ीं
कनासर रेंज में काटे गए पेड़ों के स्लीपर और फट्टे जिनके घरों से बरामद हुए हैं, उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग की ओर से एच-टू केस काटे गए हैं। वह खुद इस मामले में संलिप्त थे या नहीं संबंधित लोगाें को खुद ही यह साबित करना है। इंडियन एविडेंस एक्ट और भारतीय वन अधिनियम 1927 के अनुसार, ऐसे मामलों में जिनके घर माल बरामद होता है, उसी को सिद्ध करना होता है कि वह इस मामले में संलिप्त था या नहीं।
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बीते दिनों कनासर रेंज की कुछ कंर्पाटमेंट में मेरे निरीक्षण के दौरान पेड़ों को काटने के लिए आधुनिक पावर चेन शो जैसी मशीनों के इस्तेमाल के पुख्ता सबूत मिले। ऐसी मशीनें आमतौर पर लोग अपने घरों में नहीं रखते हैं। इस मशीनों की तलाश की जा रही है। कुछ प्रोफेशनल लोगों के भी इसमें संलिप्त होने की सूचना मिली है। उनकी भी तलाश की जा रही है। - डॉ. विनय भार्गव, वन संरक्षक, यमुना वृत्त