इस मौके पर दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि संतों के सानिध्य में ही व्यक्ति के उत्तम चरित्र का निर्माण होता है। संतों के उपदेश तभी सार्थक हैं, जब व्यक्ति इन्हें अपने अंत:करण में प्रविष्ट कर सत्कर्मों की और अग्रसर हो।
योगानंद फाउंडेशन ट्रस्ट के परमाध्यक्ष स्वामी सत्यव्रतानंद महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है और सदैव परोपकार को समर्पित रहता है। इस अवसर पर महंत विनोद महाराज, महंत प्रेमदास, महंत मोहनदास रामायणी, स्वामी जगदीशानंद गिरी, महंत ललितानंद, स्वामी ऋषि रामकिशन, स्वामी चंद्रचैतन्य, साध्वी रतना माता, स्वामी सुरेशानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी भोलापुरी, हरिनंदन शास्त्री आदि मौजूद रहे।