जांच पड़ताल करने के बाद 14 अक्तूबर 2008 को तीन आरोपियों फ्रांसिस उर्फ जुगल किशोर निवासी श्रद्धापुरी थाना कंकरखेड़ा मेरठ, अरुण वाल्मीकि निवासी डिडौली जेपीनगर और विपिन पंवार उर्फ बबलू निवासी दक्षिणपुरी सेक्टर 525 नई दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। 15 अक्तूबर 2008 को तीनों की निशानदेही पर डिडौली गांव से आश्रम से मर्सी के लूटे हुए जेवरात भी बरामद किए गए। इस मुकदमे में 20 अक्तूबर 2008 को पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
जया ठाकुर के मुताबिक मुकदमे में अभियोजन की ओर से वादी, विवेचक, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, फिंगर प्रिंट्स एक्सपर्ट आदि समेत कुल 12 गवाह पेश किए गए। इसके अलावा कुल 38 अभिलेखीय साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए। इन सभी साक्षी और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने सोमवार को तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा का एलान किया। दोषियों को धारा 302 (हत्या) में उम्रकैद व पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 394 (लूट) में पांच वर्ष कारावास व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।