श्रीनगर गढ़वाल की बेटी समुद्र की लहरों पर नया अध्याय लिखने जा रही है। नौसेना के साहसिक अभियान सागर परिक्रमा के लिए शहर की लेफ्टिनेंट वर्तिका जोशी का चयन किया गया है।
इस अभियान में भारतीय नौसेना की तीन महिलाएं एक नौका के जरिए पूरी दुनिया का चक्कर लगाएंगी। फिलहाल वर्तिका सहित तीनों महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
एक नौका से पूरी दुनिया का चक्कर
भारतीय नौसेना समुद्री नौकायन में नया अध्याय बनाएगी। साहसिक अभियान के तहत पहली बार महिला दल इंडियन नेवल सेलिंग वेसल (आईएनएसवी) महादेई नौका में पूरी दुनिया का चक्कर लगाएगा।
श्रीनगर की बेटी लेफ्टिनेंट वर्तिका जोशी भी इस अभियान का हिस्सा होंगी। लेफ्टिनेंट वर्तिका ने बताया कि इस अभियान में उनके साथ लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेता कपूर और सब लेफ्टिनेंट पी स्वाती रहेंगी।
इसके लिए तीनों महिला नौसैनिकों को अलग-अलग प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 13 मार्च को केपटाउन से शुरू हुए पहले चरण में लेफ्टिनेंट कमांडर श्वेता कपूर दो वरिष्ठ अधिकारियों के साथ केपटाउन से रियो तक 5 हजार नॉटिकल मील का सफर तय कर चुकी हैं।
रियो से केपटाउन तक सफर करेंगी वर्तिका
अब वर्तिका रियो से केपटाउन और स्वाति केपटाउन से गोवा तक का सफर करेंगी। वर्तिका के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य दुनिया को भारतीय महिलाओं के साहस और कार्यकुशलता से रूबरू करवाना है।
वर्तिका की इस उपलब्धि पर उनके पिता प्रो. पीके जोशी और माता डॉ. ए जोशी बहुत खुश हैं। प्रो. जोशी ने बताया कि वर्तिका पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी अव्वल है।
अब तक पेंटिंग, संगीत, वाद-विवाद व खेलों में कई पुरस्कार जीत चुकी है। उन्होंने बताया कि एशियन पेंट की ओर से आयोजित राष्ट्रीय पेंटिंग प्रतियोगिता में वर्तिका ने पहला स्थान हासिल किया था।
देश के लिए कुछ कर गुजरने जज्बे के कारण ही 2010 में एमीटी विश्वविद्यालय से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद नौ सेना में शामिल हुई।
आईएनएसवी महादेई एक नजर में
नौसेना के लिए भारत में बनाई गई स्वदेशी पाल नौका है। इसका नाम गोवा की मांडवी या महादेई नदी के नाम पर रखा गया है।
फाइबर ग्लास से बनी 17.1 मीटर लंबी यह नाव नवीनतम संचार और नेविगेशन उपकरणों से लैस है। इस नौका से दुनिया के किसी भी कोने में संपर्क किया जा सकता है।
इसे 2009 में नौसेना में शामिल किया गया था। इससे पहले इस नाव में नौसेना के कमांडर दिलीप ढोंडे व लेफ्टिनेंट कमांडर अभिलाष टॉमी अलग-अलग अभियानों में अकेले दुनिया का चक्कर लगा चुके हैं।