30 जनवरी को उन्हें जबरन उठाकर दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले ही दिन उन्हें पूरी तरह स्वस्थ बताकर वापस मातृसदन भेजा गया था। तब से वे लगातार अनशनरत हैं। तीन दिन से प्रशासन उनपर नजर रखे था।
पंद्रह फरवरी की रात में एसडीएम कुश्म चौहान के नेतृत्व में गई टीम ने भी उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए समझाने का प्रयास किया था, इसके बाद प्रशासन ने मातृ सदन के बाहर एक नोटिस भी चस्पा कर दिया था। इस नोटिस में भी अनशन समाप्त करने के लिए कहा गया था।
सोमवार की सुबह अचानक साध्वी पद्मावती की तबीयत खराब हो गई। उन्हें मातृ सदन के संतों ने रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया ओर ज्यादा गंभीर हालत देखते हुए हॉयर सेंटर के लिए रेफर कर दिया।
सवा एक बजे साध्वी को प्राइवेट एंबुलेंस में लेकर मातृ सदन के संत एम्स दिल्ली के लिए रवाना हुए। प्रशासन को इसकी सूचना मिलते ही अधिकारियों ने भागदौड़ शुरू की। अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सीओ अभय प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम ने शांतरशाह चौकी के पास एंबुलेंस को रुकवा लिया।
सरकारी एंबुलेंस बुलवाकर साध्वी पद्मावती को उसके जरिए ऋषिकेश स्थित एम्स में ले जाया जाने लगा। इस दौरान संतों और अधिकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। अभी प्रशासन की टीम ज्वालापुर तक पहुंची थी कि उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद साध्वी को वापस दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया।
साध्वी पद्मावती के साथ मातृ सदन के संत और कनखल थानाध्यक्ष विकास भारद्वाज समेत अन्य कर्मचारी भी भेजे गए हैं। गंगा की रक्षा के लिए एक्ट बनाने समेत कई मांगों को लेकर साध्वी पद्मावती के अनशन का मामला संसद में भी गूंजा था। नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार ने बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा उठाया था।
उन्होंने साध्वी की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से अनशन समाप्त कराने की अपील की थी। कौशलेंद्र कुमार बीते दिनों बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा के साथ मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का समर्थन-पत्र लेकर हरिद्वार भी पहुंचे थे। वहीं, योगी सरकार के निर्देश पर मुजफ्फरनगर के एसडीएम और सीओ ने भी हाल ही में मातृ सदन पहुंचकर साध्वी से अनशन समाप्त करने की अपील की थी।