दून घाटी विशेष क्षेत्र प्राधिकरण (साडा) के 2031 और पौड़ी गढ़वाल के 2025 के मास्टर प्लान को शासन ने मंजूरी दे दी है। साडा के प्लान में जोनिंग रेगुलेशन को जोड़ते हुए अधिक विस्तृत और लचीला बनाया गया है। इससे साडा क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां आसान हो सकेगी। नए मास्टर का नोटिफिकेशन कर दिया गया है।
साडा के तहत पश्चिम में यमुना, पूर्व में गंगा, उत्तर में मसूरी की पहाड़ियां और दक्षिण में शिवालिक के बीच का क्षेत्र (एमडीडीए को छोड़कर) शामिल किया गया है। इसे 12 सेक्टरों माजरी ग्रांट, भानियावाला, भाऊवाला, डोईवाला, रानीपोखरी, सेलाकुई, विकासनगर, हरबर्टपुर, डाकपत्थर, सहसपुर, सिया कैंपटी और थानों में बांटा गया है।
अभी तक मास्टर प्लान में लैंड यूज न होने के कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ती थी। आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां करना भी मुश्किल हो रहा था। मास्टर प्लान में जो नए आवासीय क्षेत्र नए विकसित हुए हैं, उन्हें आवासीय लैंड यूज दिया गया है। विकासनगर, सेलाकुई, रानीपोखरी समेत पूरे साडा क्षेत्र में सड़क के किनारे के आबादी वाले इलाकों को मिश्रित या व्यावसायिक लैंड यूज दिया गया है।
साडा और पौड़ी के मास्टर प्लान को शासन ने मंजूरी दे दी है। इससे इन क्षेत्रों में नियोजित विकास संभव हो सकेगा। लोगों की दिक्कतों और सुझावों को मास्टर प्लान में शामिल किया गया है।
कृषि लैंड यूज पर भी बना सकेंगे मकान
साडा के मास्टर प्लान-2031 के तहत कृषि लैंड यूज वाली जमीन पर भी मकान बनाया जा सकेगा। 75 वर्ग मीटर तक के निर्माण में लैंड यूज बदलवाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। सरकार के इस निर्णय से साडा क्षेत्र के लाखों लोगों को फायदा मिलेगा।
साडा के मास्टर प्लान के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपनी कृषि भूमि में 75 वर्ग मीटर तक बिना लैंड यूज चेंज किए भी आवास बना सकता है। इससे अधिक क्षेत्रफल में निर्माण के लिए लैंड यूज चेंज कराना अनिवार्य होगा। नए प्रावधानों के मुताबिक सेक्टर से बाहर जोनिंग के मुताबिक पर्यटन समेत अन्य गतिविधियां शामिल की गई है।
मसूरी से लगे कैंपटी समेत आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में होटल, रिसॉर्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियां बहुत अधिक बढ़ी है। इसको देखते हुए उन क्षेत्रों में नए लैंड यूज जोड़े गए हैं, जिससे व्यावसायिक गतिविधियां आसानी से हो सकेगी। वहीं बाहरी क्षेत्रों में आवासीय व व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने पर उनमें भी लैंड यूज जोड़ा गया है।
सबका नुकसान बचेगा
मास्टर प्लान न होने के चलते साडा के अधिकांश क्षेत्रों में अवैध निर्माण जोरों पर था। लैंड यूज न होने के कारण लोगों को नक्शा पास कराने में दिक्कत थी। इससे अनियोजित निर्माण को बढ़ावा तो मिला ही सरकार को राजस्व का निर्माण भी हुआ। मास्टर प्लान लागू होने के बाद यह दिक्कत नहीं रहेगी।
आसानी से होगी कंपाउंडिंग
लैंड यूज कम होने के कारण पुराने निर्माण के चालान तो होते थे लेकिन कंपाउंडिंग नहीं हो पाती थी। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज बढ़ा दिए गए हैं। इससे निर्माण की कंपाउंडिंग आसानी से हो सकेगी। इससे जहां अनियोजित निर्माण पर रोक लगेगी वहीं सरकार को राजस्व भी मिलेगा।
जनसंख्या, घनत्व, गतिविधियां बनी आधार
मास्टर प्लान में लैंड यूज जनसंख्या, घनत्व और गतिविधियों के आधार पर तय किया गया है। जिन क्षेत्र में आवासीय या व्यावसायिक गतिविधियां ज्यादा हैं, उन्हें उसी लैंड यूज में रखा गया है। इनके अलावा कई अन्य क्षेत्रों को चिन्हित किया है, जो प्लान में शामिल की गई है। कुछ ऐसी बड़ी गतिविधियां या प्रोजेक्ट हैं, जिनका लैंडयूज पहले चेंज किया गया है, उन्हें शामिल नहीं किया गया है। वो लैंडयूज पुराने तरीके से ही चलेगा।
नई गतिविधियां भी होंगी शामिल
मास्टर प्लान में जोनिंग रेगुलेशन का प्रावधान भी किया गया है। इससे प्लान लचीला और विस्तृत हो गया है। इसके तहत उन गतिविधियों को शामिल किया गया है, जो पहले छूट गई या नई हैं। उदाहरण के लिए पहले फॉर्म हाउस के मामले शामिल न होने के कारण मंजूर नहीं हो पाते थे, अब उसे स्पष्ट कर दिया गया है।
तीन औद्योगिक क्षेत्र तय
मास्टर प्लान में सेलाकुई, सहसपुर और लालतप्पड़ को इंडस्ट्रियल सेक्टर निर्धारित किया गया है। उद्योग विभाग के इनपुट के आधार पर अगले 20 से 25 साल के लिए रेड कैटेगरी को छोड़कर ऑरेंज और ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों की संभावनाओं वाले क्षेत्र शामिल हैं।