हल्द्वानी में गत चार अप्रैल को मासूम जैद को गौला पुल से फेंकने वाली विक्षिप्त की हालत एसटीएच में चल रहे इलाज से कुछ सुधरी है, जिससे उसकी बीती जिंदगी पर छायी धुंध छंटने की आस है।
वह अपना मूल घर नेपाल के महेंद्र नगर में बता रही है, इसके अलावा बरेली एक युवक से प्रेम विवाह की बात कहती है। पर पिता और पति का नाम आते ही उसके चेहरे पर दर्द और नाराजगी की सिलवटे उभर आती है। पिता से एक न भूलने वाला धोखा तो पति से अपमान और बेकद्री की बात कहती है।
बीच-बीच में उसमें अपने बच्चों की एक कसक भी दिखाई देती है। उसकी यह बात कितनी सच है, यह तो पता नहीं। पर उसकी बात से लगता है, उसकी जिंदगी कोई एक ऐसा दुखद पक्ष था, जिससे उसकी मानसिक हालत बिगड़ गई। पर इन सभी बातों के बीच एक बात कोई नहीं भूल सकता कि उसके हाथ एक मासूम का खून हुआ है।
ये विक्षिप्त औरत कहां से आई, उसकी मानसिक स्थिति ऐसी क्यों हुई कि उसने एक मासूम को बेरहमी से मार दिया। इसको जानने को हम बुधवार को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे।
सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि वह खुद का नाम दीपा बताती है, वह रात में खाना खाकर आराम से सोई। सुबह खुद बोतल में पानी भरकर लाई। लगा कि उसकी हालत में कुछ सुधार है। फिर हमने यूं ही बातों का सिलसिला शुरू किया। उससे अंग्रेजी, हिंदी वर्णमाला पूछी तो उसने तत्काल सुना दी। जब बात शुरू हुई, तो दीपा ने बीती जिंदगी के बारे में बताना शुरू किया।
हम ये तो नहीं कह सकते हैं कि दीपा जो बता रही है वह सच है, लेकिन शहर, जिले और देश के नाम सही बता रही है। इसलिए उसकी कहानी कुछ-कुछ तो ठीक हो सकती है। बकौल दीपा वह मूलरूप से नेपाल के महेंद्रनगर जिले के गौजी निवासी धन सिंह अधिकारी की बेटी है। उसके भाई शेर सिंह अधिकारी दुकान चलाते हैं।