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पिता और पति के शर्मनाक धोखे से मां बनी हत्यारन

Thu, 09 Apr 2015 04:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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हल्द्वानी में गत चार अप्रैल को मासूम जैद को गौला पुल से फेंकने वाली विक्षिप्त की हालत एसटीएच में चल रहे इलाज से कुछ सुधरी है, जिससे उसकी बीती जिंदगी पर छायी धुंध छंटने की आस है।
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वह अपना मूल घर नेपाल के महेंद्र नगर में बता रही है, इसके अलावा बरेली एक युवक से प्रेम विवाह की बात कहती है। पर पिता और पति का नाम आते ही उसके चेहरे पर दर्द और नाराजगी की सिलवटे उभर आती है। पिता से एक न भूलने वाला धोखा तो पति से अपमान और बेकद्री की बात कहती है।

बीच-बीच में उसमें अपने बच्चों की एक कसक भी दिखाई देती है। उसकी यह बात कितनी सच है, यह तो पता नहीं। पर उसकी बात से लगता है, उसकी जिंदगी कोई एक ऐसा दुखद पक्ष था, जिससे उसकी मानसिक हालत बिगड़ गई। पर इन सभी बातों के बीच एक बात कोई नहीं भूल सकता कि उसके हाथ एक मासूम का खून हुआ है।
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ये विक्षिप्त औरत कहां से आई, उसकी मानसिक स्थिति ऐसी क्यों हुई कि उसने एक मासूम को बेरहमी से मार दिया। इसको जानने को हम बुधवार को सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे।

सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि वह खुद का नाम दीपा बताती है, वह रात में खाना खाकर आराम से सोई। सुबह खुद बोतल में पानी भरकर लाई। लगा कि उसकी हालत में कुछ सुधार है। फिर हमने यूं ही बातों का सिलसिला शुरू किया। उससे अंग्रेजी, हिंदी वर्णमाला पूछी तो उसने तत्काल सुना दी। जब बात शुरू हुई, तो दीपा ने बीती जिंदगी के बारे में बताना शुरू किया।

हम ये तो नहीं कह सकते हैं कि दीपा जो बता रही है वह सच है, लेकिन शहर, जिले और देश के नाम सही बता रही है। इसलिए उसकी कहानी कुछ-कुछ तो ठीक हो सकती है। बकौल दीपा वह मूलरूप से नेपाल के महेंद्रनगर जिले के गौजी निवासी धन सिंह अधिकारी की बेटी है। उसके भाई शेर सिंह अधिकारी दुकान चलाते हैं।
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बाप ने 15 हजार में बेच दिया

उसका प्रेम विवाह अवलिया बरेली के राकेश के साथ हुआ था, लेकिन पिता ने उसे बरेली जिले के आलमपुर निवासी पप्पू के हाथ 15 हजार रुपए में बेच दिया था। पप्पू उसके साथ अच्छा सलूक नहीं करता था। उसके चार बच्चे भी हैं। पुलिस ने उसे वीडियो बनाने के आरोप में जेल भेज दिया।

बच्चे उसके जेठ भगवान दास पाल रहे हैं। दीपा कहती है कि वह इंटर तक पढ़ी है। जब बात जैद की आती है, तो वह उसे अपना ही बच्चा बताती है और उसको मारने की बात से इंकार भी कर देती है। पर यह बात कोई कैसे भूल सकता है कि उसने एक झटके में जैद की जिंदगी और उसके परिवार की खुशियों को छिन लिया।

इसी दौरान उसका ध्यान अभिरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों पर जाता है, तो वह उनसे घर भेजने की जिद करने लगती है। पुलिस कर्मी बताते हैं कि उसने पिता की जगह भाई शेर सिंह से मिलने की इच्छा जताई। सुरक्षा में तैनात महिला सिपाही कुमुद बिष्ट का कहना था कि 12 घंटे में उसे दो-तीन बार दौरा पड़ता है। हालांकि पहले से उसकी हालत में काफी सुधार हुआ है।

काउंसिलिंग से पता चलेगा मरीज का व्यवहार
मानसिक रोगी दीपा की काउंसिलिंग करके उसके व्यवहार के बारे में पता किया जा सकता है। मनोचिकित्सक डॉ. मनोज त्रिवेदी ने बताया कि मानसिक रोगी होने के तीन कारण होते हैं। जेनेटिक (वंशानुगत), अधिक स्ट्रेस (तनाव) और व्यक्तित्व।

कई बार दिमाग में न्यूरो ट्रांसमीटर में बदलाव के कारण ही मानसिक रोग होता है। उन्होंने बताया इस्थीजोफिरिनिया के कारण मानसिक रोगी हो जाता है। डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि मानसिक रोगी की दवा के साथ काउंसिलिंग करनी चाहिए। काउंसिलिंग में बातचीत कर पता लगाया जा सकता है कि दीपा बच्चों पर ही क्यों झपट रही है।

कहीं उसके साथ कोई अनहोनी तो नहीं हुई। उसके बच्चे के साथ कोई घटना तो नहीं घटी, जिससे दीपा ऐसा कर रही है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि इस्थीजोफिरिनिया के कारण भी दिमाग जो बात बैठ जाती है, रोगी वही करता है।
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