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कर्ज के चलते एक किसान ने दी जान, पढ़ें किसान के संघर्ष की दर्दनाक कहानी

Mon, 07 Aug 2017 12:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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किसान आत्महत्या - फोटो : SELF
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किसान जो अन्नदाता कहा जाता है वह कर्ज के बोझ तले दबकर आज खुद को खत्म करने पर मजबूर हो गया है। लालकुआं क्षेत्र में एक किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। 
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बताया जा रहा है कि किसान पर बेटे के इलाज के कारण लाखों रुपये का कर्ज था और इस कारण वह तनाव में था। कुमाऊं में किसान आत्महत्या का यह छठा मामला है।

शास्त्रीनगर बिंदुखत्ता निवासी किसान धन सिंह डसीला (60) रविवार की दोपहर जहर खाने के बाद एक दुकान के सामने बेहोश हो गए। दुग्ध समिति में कार्यरत उनका बेटा पवन सिंह डसीला ड्यूटी कर लौटा तो उसे पिता के बेहोश होने की जानकारी मिली।

पिता को अस्पताल ले जाने के लिए उसने छह बार 108 नंबर की एंबुलेंस को कॉल किया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई।

इलाज के लिए लाखों रुपये का कर्ज लिया था

farmer suicide
पड़ोसियों ने एक कार चालक से मदद मांगी तब जाकर धन सिंह को बेस अस्पताल लाया जा सका। यहां उपचार के दौरान 15 मिनट में उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टर का कहना था कि धन सिंह को जहर खाए काफी वक्त बीच चुका था।

पड़ोसी मोहन सिंह बिष्ट ने बताया कि धन सिंह की चार बेटियां और एक बेटा है। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटे के बीमार रहने से धन सिंह परेशान थे। इलाज के लिए लाखों रुपये का कर्ज भी लिया था। इसी कारण वह काफी तनाव में रहते थे।

सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया। कुमाऊं में यह किसान आत्महत्या का छठा मामला है। अब तक ऊधमसिंह नगर में तीन, बागेश्वर में एक, पिथौरागढ़ में एक किसान आत्महत्या का मामला सामने आ चुका है।
 
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एंबुलेंस आती तो बच सकती थी जान 

108
पड़ोसी मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि वह किसान के बेहोश होने की जानकारी मिलने पर अपने खेत से दौड़कर आए थे।

108 नंबर एंबुलेंस को बुलाने के चक्कर में काफी देर हो गई लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।

अस्पताल पहुंचने में दो घंटे लग गई। रास्ते में कई जगह जाम लगा था। यदि समय से एंबुलेंस आती तो शायद किसान की इलाज से जान बच सकती थी।
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