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फॉरेस्ट अफसरों की तबादला सूची में खेल, भड़के आईएफएस

Thu, 04 Aug 2016 01:44 PM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून
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तबादले - फोटो : डेमो पिक
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स्वास्थ्य विभाग के बाद अब वन विभाग में सेवारत आईएफएस अफसरों की तबादला सूची से भी खिलवाड़ किया गया। सिविल सर्विसेज बोर्ड की ओर से संस्तुत सूची में भेजे गए आधे से ज्यादा नाम बदलकर उनके स्थान पर अपने चुनिंदा अफसरों को पोस्टिंग दे दी गई।
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सोमवार देर रात जारी सूची जब अफसरों के हाथ लगी तो खलबली मच गई। इससे आईएफएस अफसर भड़क गए। मामले को तूल पकड़ता देख बुधवार को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। मामला बढ़ता देख अब सूची में संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है।

आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों के तबादलों के लिए सुप्रीम कोर्ट और प्रशासनिक सुधार आयोग के निर्देश पर सिविल सर्विसेज बोर्ड बनाने की कवायद देश भर में शुरू हुई थी। इसका मकसद मनमाने तरीके से होने वाले तबादलों को रोकना था। तबादलों को लेकर बोर्ड की बैठक समय-समय पर आयोजित करके सूची मुख्यमंत्री को भेजी जाती है।
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इसी सूची के आधार पर तबादले किए जाते हैं। नियम यह भी है कि सरकार की ओर से सूची में किसी नाम को बदलना है तो उसका कारण भी स्पष्ट करना होगा। उत्तराखंड में वर्ष 2011 में बोर्ड तो बनाया गया, लेकिन सिर्फ फॉरेस्ट सर्विस के लिए। काफी दिनों से फॉरेस्ट सर्विस के अफसरों के तबादलों के लिए बैठक की तैयारी चल रही थी।
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बोर्ड और शासन की सूची में भारी अंतर

ट्रांसफर - फोटो : demo pic
बीते सप्ताह मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी समेत अन्य अफसरों की बोर्ड बैठक में तबादले की सूची तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भिजवा दी गई। इस आधार पर सोमवार की देर रात 47 आईएफएस अफसरों के तबादलों का आदेश जारी हो गया। मगर जब यह सूची अफसरों के हाथ लगी तो मालूम चला कि बोर्ड की ओर से संस्तुत और शासन की ओर से जारी सूची में भारी अंतर हैं। अगले दिन इसे लेकर खलबली मच गई।

इसकी खबर कुछ अफसरों ने मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव को दी। दोनों सूचियों में मिलान किया गया तो अंतर स्पष्ट नजर आया। इसमें किसी का नाम बदलने के पीछे कोई कारण भी स्पष्ट नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो इस प्रकार की मनमानी को लेकर आईएफएस अफसरों में भारी रोष व्याप्त है।

बोर्ड अपनी सिफारिश करता है। मगर इसे मानने की बाध्यता नहीं होती। विभाग के हित में यदि किसी का नाम जोड़ना-घटाना है तो किया जाता है। बाद में मुख्यमंत्री की स्वीकृति से तबादले जारी किए जाते हैं।
-दिनेश अग्रवाल, वन मंत्री

बोर्ड द्वारा संस्तुत सूची में भेजे गए नाम और शासन द्वारा जारी सूची में मौजूद नामों में फर्क की जानकारी मिली है। कितने और कौन से नाम परिवर्तित हैं, इसे सूची देखकर ही बताया जा सकता है।
-शत्रुघ्न सिंह, मुख्य सचिव
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