महिला मित्र के साथ घूमने वाले शादीशुदा लोग थे निशाना
एसपी मनोज कत्याल ने बताया कि गिरोह में शामिल चारों लोग बेहद शातिर ढंग से अपराध को अंजाम देते थे। ये लोग संपर्क मार्गों में महिला मित्र के साथ घूमने वाले शादीशुदा लोगों की वीडियो बनाते थे। फिर उनको तस्दीक करने के बाद वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल कर रुपये ऐंठते थे। बदनामी के डर से ऐसे लोग पुलिस से शिकायत भी नहीं करते थे जिसका फायदा ये लोग उठाते थे। आरोपियों से पूछताछ और मोबाइल खंगालकर जानकारी जुटाई जा रही है कि इन लोगों ने कितने लोगों को अब तक शिकार बनाया है।
जमानत कराने को लिए थे चार हजार, नहीं चुका पाने पर अंकित बन गया अपराधी
लोगों का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपी अंकित यादव ने जेल में बंद गैंग लीडर की जमानत कराने के लिए चार हजार रुपये लिए थे। बाद में बात नहीं बनने पर वह चार हजार रुपये नहीं लौटा पाया तथा ज्यादा रुपये कमाने के लालच में उसने जरायम की दुनिया में कदम रखा। अंकित का यही कदम अब उसे सलाखों के पीछे ले गया।
पुलिस के अनुसार किच्छा के गौरीकला निवासी अंकित यादव फाइनेंस कंपनी में मोबाइल फाइनेंस का काम करता था। बाद में वह कंपनी में डिलीवरी ब्वाय बन गया था। मोबाइल फाइनेंस कराने के दौरान ही उसकी मुलाकात ब्लैकमेलर गैंग के सरगना सुखी और खजान से हुई थी। मारपीट, लूट, आर्म्स एक्ट सहित अन्य केसों में सुखी जेल चला गया था। दो महीने पहले सुखी के करीबी उसके लिए जमानती खोज रहे थे जिस पर अंकित ने सुखी की जमानत लेने के लिए चार हजार रुपये लिए थे लेकिन सुखी की जमानत के लिए 50 हजार की हैसियत चाहिए थी।
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि अंकित इतनी रकम की हैसियत नहीं बनवा पाया और वह सुखी की जमानत नहीं ले सका था। इसके बाद सुखी ने किसी दूसरे जमानती को राजी करवाकर जमानत कराई। जेल से छूटने के बाद सुखी और उसके साथियों ने अंकित से चार हजार रुपये वापस मांगे थे लेकिन अंकित रुपये नहीं लौटा सका था। इसके बाद और ज्यादा रुपये कमाने के लालच में वह सुखी का सहयोगी बन गया। अंकित की उम्र 22 साल है जबकि पकड़े गए दूसरे आरोपी रिम्पू सिंह की उम्र 24 साल है जो कि खेती करता है।