कोर्ट ने कहा कि कोई भी सरकारी परियोजना का निर्माण जनता के टैक्स के पैसों से होता है यदि इसकी बर्बादी कुछ अधिकारियों की लापरवाही से होती है तो इसका संज्ञान सरकार को अवश्य लेना होगा। कोर्ट ने कहा कि जानकारी मिली है कि निर्माणाधीन पुल दूसरी बार टूट कर गिरा है, परंतु शायद इस संदर्भ में शासन-प्रशासन के स्तर से कोई विधिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। यह परियोजना भ्रष्टाचार का एक जीवंत उदाहरण है।
कोर्ट ने मामले की विवेचना में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा कि विवेचक ने इस मामले में बेहद लापरवाही पूर्वक तथा गैर जिम्मेदार तरीके से विवेचना की है। जिससे विवेचक प्रदीप सिंह चौहान व तत्कालीन सीओ के खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।