फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rudraprayag: कोर्ट का कड़ा रुख, कहा- नरकोटा पुल भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण, दो मजदूरों की हुई थी मौत

Sun, 28 Sep 2025 09:41 AM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग

सार

रुद्रप्रयाग के नरकोटा में निर्माणाधीन पुल टूट गया था, जिसमें दो मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके बाद यह मामला कोर्ट पहुंचा था।
विज्ञापन
- फोटो : Adobe Stock Image
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में नरकोटा में निर्माणाधीन पुल भ्रष्टाचार का जीवंत उदाहरण है। पुल निर्माण में विभिन्न स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। यह बात मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार ने नरकोटा पुल शटरिंग से गिरकर दो मजदूरों की मौत मामले में फैसला सुनाते हुए कही।

विज्ञापन


कोर्ट ने मामले की विवेचना में पुलिस की भूमिका को भी लापरवाही पूर्ण व गैर जिम्मेदार बताते हुए कहा कि तत्कालीन सीओ तथा विवेचक पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि समस्त साक्ष्यों के आधार पर पाया गया है कि निर्माणदायी संस्था के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुल निर्माण कार्य में लापरवाही बरती। जिससे जन-धन की हानि हुई। मृतक मजदूर के परिजनों ने केस दर्ज कराया जबकि यह जिम्मेदारी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की बनती थी। सरकार को इस तथ्य का संज्ञान लेकर कंपनी के अधिकारियों, इंजीनियरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त पुल से हुई जनधन हानि की वसूली करनी चाहिए।
विज्ञापन


धराली आपदा: लापता लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की केंद्र ने दी मंजूरी, 67 लोगों का नहीं लगा सुराग

Trending Videos
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि कोई भी सरकारी परियोजना का निर्माण जनता के टैक्स के पैसों से होता है यदि इसकी बर्बादी कुछ अधिकारियों की लापरवाही से होती है तो इसका संज्ञान सरकार को अवश्य लेना होगा। कोर्ट ने कहा कि जानकारी मिली है कि निर्माणाधीन पुल दूसरी बार टूट कर गिरा है, परंतु शायद इस संदर्भ में शासन-प्रशासन के स्तर से कोई विधिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। यह परियोजना भ्रष्टाचार का एक जीवंत उदाहरण है।

कोर्ट ने मामले की विवेचना में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कहा कि विवेचक ने इस मामले में बेहद लापरवाही पूर्वक तथा गैर जिम्मेदार तरीके से विवेचना की है। जिससे विवेचक प्रदीप सिंह चौहान व तत्कालीन सीओ के खिलाफ भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें