सावन मास में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सावन में रुद्राभिषेक से जहां हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है वहीं मनचाही मुराद पूरी होती है।
यही कारण है कि शहर से देहात तक इन दिनों रुद्राभिषेक के लिए पंडितों की डिमांड बढ़ गई है। इसके लिए 11 सौ रुपये लेकर 11 हजार रुपये तक शुल्क निर्धारित हैं, हालांकि कुछ पंडित श्रद्धानुसार दान की भी बात कहते हैं।
शहर के विभिन्न शिवमंदिरों से लेकर घरों तक इन दिनों भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। श्रद्धालु व्रत रखकर पूजा अर्चना में जुटे हैं। इसके तहत जगह-जगह रुद्राभिषेक का पाठ और महामृत्युंजय का जाप भी किया जा रहा है। इसके लिए शहर से देहात तक पंडितों की डिमांड बढ़ गई है।
आप स्वयं भी कर सकते हैं रुद्राभिषेक
सावन मास में रुद्राभिषेक
सावन माह के सोमवार को या फिर किसी भी दिन नहा धोकर दूध, दही, शहद, गंगाजल, घी से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। इसके बाद जनेऊ, वस्त्र, भांग, धतूरा, बेलपत्र, सुपाड़ी, पान के पत्ते, फूलमाला, फल आदि भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं। फिर ओऊम नम: शिवाय का जाप 108 या फिर 1008 बार करना है।
अंत में शिव की आरती और परिक्रमा कर आप रुद्राभिषेक के फल की प्राप्ति कर सकते हैं। पूजन अर्चन के लिए शिव की मूर्ति नहीं होने पर आप मिट्टी का शिवलिंग घर पर बना सकते हैं, लेकिन पूजा के बाद इसे गंगा जी में प्रवाहित करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि कष्टों के निवारण और दीर्घायु के लिए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप को रामबाण औषधि बताया गया है। सावन माह के दौरान भगवान विष्णु शयन में होते हैं इसलिए भगवान शिव ही सृष्टि के संचालक होते हैं। शिव जल के देवता हैं, इसलिए सावन में अनेक प्रकार से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है। रुद्राभिषेक के लिए 11 सौ रुपये से लेकर 11 हजार रुपये लिए जाते हैं।
इस बार श्रद्धालुओं की जेब ज्यादा होगी ढीली
सावन मास में रुद्राभिषेक
स्थिति यह है कि सावन में रुद्राभिषेक के लिए 11 सौ रुपये से लेकर 11 हजार रुपये तक रेट निर्धारित किया गए हैं, हालांकि कुछ पंडितों की ओर से श्रद्धानुसार दान की बात कही जा रही है। पंडितों के अनुसार पिछले वर्ष सावन में रुद्राभिषेक के लिए 800 रुपये लिए जा रहे थे, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर न्यूनतम 1100 रुपये कर दिया गया है।
ऐसे में रुद्राभिषेक कराने वाले श्रद्धालुओं की जेब पिछले साल के मुकाबले अधिक ढीली हो रही है। ज्योतिषाचार्य और पंडितों के अनुसार भगवान शिव के रुद्र रूप की महिमा अनंत है। यही कारण है कि रुद्राभिषेक के महत्व को वेदों, पुराणों और उपनिषदों में भी वर्णित किया गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल का कहना है कि वैसे तो पूरे सावन माह में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है, लेकिन सावन के सोमवार को इसका महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है।