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अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम में मंत्री पर भड़के भाजपाई, शिलापट्ट तोड़ा, कुर्सियां फेंकी

Sun, 04 Jun 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर 
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वनमंत्री हरक सिंह रावत को शनिवार को अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं का विरोध झेलना पड़ा। रामनगर वन प्रभाग के विश्राम गृह में आयोजित पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व के प्रतीक चिह्न के अनावरण कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को न बुलाए जाने से नाराज भाजपाइयों ने खासा बवाल काटा।
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शिलापट्ट तोड़ दिया गया, कुर्सियां फेंकी गई और वन मंत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। कार्यकर्ताओं का गुस्सा देख वन मंत्री को बिना अनावरण के ही लौटना पड़ा। 

शनिवार की सुबह 9:30 बजे वन मंत्री हरक सिंह रावत वन विश्राम गृह रामनगर पहुंचे। यहां तयशुदा कार्यक्रम के तहत उन्हें रामनगर वन प्रभाग के पवलगढ कंजर्वेशन रिर्जव के प्रतीक चिह्न का अनावरण करना था। इसी बीच दर्जनों भाजपाई वहां पहुंच गए। उन्होंने रामनगर के स्थानीय विधायक दीवान सिंह बिष्ट का नाम आमंत्रण पत्र पर न होने पर नाराजगी जताई।
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कार्यक्रम में विधायक को न बुलाए जाने पर भी एतराज जताया। इसे विधायक का अपमान बताकर साजिश करार दिया। इसके बाद भाजपाई हंगामा करने लगे। उन्होंने वन मंत्री हरक सिंह रावत और डीएफओ नेहा वर्मा के खिलाफ नारेबाजी की। डीएफओ नेहा पर हिटलरशाही का आरोप भी लगाया।
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रेता बजरी के रेटों पर अंकुश लगाया जाएगा

​गुस्साए भाजाइयों ने शिलापट्ट तोड़कर कार्यक्रम स्थल पर रखी कुर्सियां भी फेंक दी। एसडीएम पारितोष वर्मा और कोतवाल विक्रम सिंह राठौर भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने शांत कराने का प्रयास किया मगर भाजपाई नहीं माने। विरोध करने वालों में मदन जोशी, वीरेंद्र रावत, संजय डोर्बी, राहुल भारद्वाज, भूपेंद्र सिंह खाती, चनी राम, प्रेम हाल्सी, आशीष ठाकुर, मनोज रावत, पूरन नैनवाल, बलदेव सिंह, अरुण कुमार, एस लाल, बलवंत नेगी आदि मौजूद रहे।

रेता बजरी के रेटों पर अंकुश लगाया जाएगा
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने माना कि प्रदेश में रेता और बजरी के दाम बढ़ गए हैं और इससे जनता को दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे का स्कूल बन रहा है तभी उन्हें भी  पता चला कि रेता बजरी के दाम बढ़े हैं। जल्द ही रेता बजरी के रेटों पर अंकुश लगाया जाएगा। वहीं क्षेत्र में एक महीने तक होने वाली टीवी शूटिंग के लिए डीएफओ नेहा वर्मा की ओर से परमिशन न देने दिए जाने के सवाल पर उन्होंने जांच की बात कही।

कार्यक्रम बड़ा नहीं था। यह सरकारी कार्यक्रम था। उन्हें भी फोन से सूचना दी गई थी। यदि आयोजन के आमंत्रण पत्र छपे हैं और उसमें स्थानीय विधायक का नाम नहीं है तो कार्यकर्ताओं में गुस्सा होना स्वाभाविक है। किसी की भावना को ठेस पहुंचे, ऐसी उनकी मंशा कभी नहीं रही। 
हरक सिंह रावत, वन मंत्री
 
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