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हिंदुओं और राम मंदिर को लेकर बोले मोहन भागवत, इशारों-इशारों में पीएम मोदी के लिए कह गए बड़ी बात

Mon, 01 Oct 2018 09:09 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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बाबा रामदेव के साथ मोहन भागवत
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साधु स्वाध्याय संगम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि श्रीराम करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण जनमानस की भावना है और मंदिर यथास्थान पर ही बनना चाहिए।

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यह बात सभी लोग अच्छी तरह जानते और समझते भी हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि जनता का मन है कि राम मंदिर बनना चाहिए और यह हकीकत है कि जब कोई काम समाज अपने हाथ में ले लेता है तो वह रुकता नहीं है।

सोमवार को पतंजलि योग पीठ के सभागार में आरएसएस की ओर से आयोजित साधु स्वाध्याय संगम के समापन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते मोहन भागवत ने कहा कि 300 वर्षों से ईसाई मिशनरियां गुपचुप तरीके से हमारे देश में काम कर रही हैं, लेकिन धर्म बदलकर लोग ईसाई नहीं देशद्रोही बनते हैं। लोगों को इस बात को समझना चाहिए। उन्होंने बिना नाम लिए मोदी सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आदमी तो बहुत सज्जन है।
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आज देखते हैं कि जिनसे हमें बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं, उन्होंने किया बहुत कम है, लेकिन बहुत कुछ करने के लिए समय लगता है। लिहाजा धैर्य रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहला कार्य अच्छा करना नहीं बल्कि अच्छा कार्य करने के लिए माहौल बनाना होता है और इसके लिए कुर्सी पर माहौल बन जाने तक बने रहना जरूरी है। संघ प्रमुख ने कहा कि जब कुर्सी पर बैठे लोगों को यह डर सताने लगता है कि मैं ऐसा कार्य नहीं करूंगा तो कुर्सी बनी रहेगी या चली जाएगी, तब व्यक्ति गलत कार्य करता है।

साधु का काम समाज को जोड़ना होता है

राम मंदिर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जनमानस की भावना स्पष्ट है कि मंदिर बनना चाहिए। इस भावना को समझकर कुछ पार्टी के ताकतवर लोग भी राम मंदिर का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे जनता की भावना को समझ चुके हैं।

उन्होंने साधु शब्द को अति महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि साधु को इतना काबिल बनना चाहिए कि किसी भी अमीर और वजीर की उसे जरूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि आज बहुत से लोग सुख की चाह में बाहर की दौड़ लगा रहे हैं। जबकि यह बात समझनी चाहिए कि सुख मन के अंदर है। पहले उसे प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु का काम समाज को जोड़ना होता है। पहले गांव, जिला प्रांत और देश को जोड़ें, पूरी दुनिया खुद ही जुड़ जाएगी।

मोहन भागवत ने कहा कि सृष्टि की रचना जिस महान प्रयोजन के लिए हुई, हम उसके निमित्त मात्र हैं। अच्छे कार्य करने के लिए हमें अनेक बाधाओं और उपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन उपेक्षा के कारण मन में किसी भी प्रकार की निराशा नहीं आनी चाहिए। यदि हमारे संकल्प और उद्देश्य अच्छे हैं व हम उन्हें पूर्ण करने के योग्य हैं तो हम निश्चित ही सफलता प्राप्त कर सकेंगे। 
 
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देश के वजीर और अमीर से साधु को उम्मीद नहीं करनी चाहिए

योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने परंपरा में केशव बलिराम हेडगेवार, गुरुदेव और डॉ. मोहन भागवत जैसे राष्ट्रभक्त देश को दिए हैं। संघ परिवार की सेवा, साधना, राष्ट्रधर्म, राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी परंपरा रही है।

संघ परिवार ने देश को न जाने कितने सात्विक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सांसद और विधायक दिए हैं। साथ सामाजिक जीवन के विविध क्षेत्रों में शिक्षा, एकल विद्यालय, चरित्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण से लेकर राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी सेवा की साधना संघ ने की है। कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल, आचार्यकुलम के निदेशक एलआर सैनी, पतंजलि योग समिति के मुख्य केंद्रीय प्रभारी डॉ. जयदीप आर्य, राकेश, पतंजलि गुरुकुलम के संन्यासी, आचार्य, साधु और पतंजलि विश्वविद्यालय के के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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