राम मंदिर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जनमानस की भावना स्पष्ट है कि मंदिर बनना चाहिए। इस भावना को समझकर कुछ पार्टी के ताकतवर लोग भी राम मंदिर का विरोध नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे जनता की भावना को समझ चुके हैं।
उन्होंने साधु शब्द को अति महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि साधु को इतना काबिल बनना चाहिए कि किसी भी अमीर और वजीर की उसे जरूरत न पड़े। उन्होंने कहा कि आज बहुत से लोग सुख की चाह में बाहर की दौड़ लगा रहे हैं। जबकि यह बात समझनी चाहिए कि सुख मन के अंदर है। पहले उसे प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साधु का काम समाज को जोड़ना होता है। पहले गांव, जिला प्रांत और देश को जोड़ें, पूरी दुनिया खुद ही जुड़ जाएगी।
मोहन भागवत ने कहा कि सृष्टि की रचना जिस महान प्रयोजन के लिए हुई, हम उसके निमित्त मात्र हैं। अच्छे कार्य करने के लिए हमें अनेक बाधाओं और उपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन उपेक्षा के कारण मन में किसी भी प्रकार की निराशा नहीं आनी चाहिए। यदि हमारे संकल्प और उद्देश्य अच्छे हैं व हम उन्हें पूर्ण करने के योग्य हैं तो हम निश्चित ही सफलता प्राप्त कर सकेंगे।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने परंपरा में केशव बलिराम हेडगेवार, गुरुदेव और डॉ. मोहन भागवत जैसे राष्ट्रभक्त देश को दिए हैं। संघ परिवार की सेवा, साधना, राष्ट्रधर्म, राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी परंपरा रही है।
संघ परिवार ने देश को न जाने कितने सात्विक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सांसद और विधायक दिए हैं। साथ सामाजिक जीवन के विविध क्षेत्रों में शिक्षा, एकल विद्यालय, चरित्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण से लेकर राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी सेवा की साधना संघ ने की है। कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. महावीर अग्रवाल, आचार्यकुलम के निदेशक एलआर सैनी, पतंजलि योग समिति के मुख्य केंद्रीय प्रभारी डॉ. जयदीप आर्य, राकेश, पतंजलि गुरुकुलम के संन्यासी, आचार्य, साधु और पतंजलि विश्वविद्यालय के के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।