डॉ. नवीन बंसल ने बताया कि इलाज में देरी पर यह बुखार दिमाग पर असर करता है, जिसे सेरीब्रल मलेरिया कहा जाता है। ऐसा होने पर मरीज की चंद घंटों में ही मौत होने की आशंका पैदा हो जाती है। अगर मलेरिया का सही समय पर उपचार हो तो मरीज के ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है।
सीमा विवाद में फंसा नाला बना मलेरिया की जड़
कलियर के जिस क्षेत्र में मलेरिया बुखार के मरीज सामने आ रहे हैं। वहां गंदगी से अटे नाले में मच्छरों का प्रकोप है। माना जा रहा है कि इसी नाले ने मलेरिया के मच्छर पनप रहे हैं। पीड़ित परिवार के परिजन तनवीर ने बताया कि कलियर के जंवाई खेड़ा में बुखार के मरीज हैं। यह वार्ड नंबर-1 और आठ की सीमा में है। यहां के लोगों ने नगर पंचायत चुनाव में वार्ड नंबर-1 में वोट डाली थी, लेकिन अब दोनों वार्डों के प्रतिनिधि इसे एक-दूसरे की सीमा में बताकर नाले की सफाई से पल्ला झाड़ रहे हैं।
ये हैं लक्षण और उपचार
डॉ. नवीन बंसल ने बताया कि मलेरिया वायरल की तरह सामान्य लक्षण वाला है। इसमें ठंड से बुखार आना और शरीर में जकड़न दर्द की शिकायत होती है। ज्यादा दिन बाद पीलिया, उल्टी व खून की कमी की शिकायत हो जाती है। सही समय पर जांच और इलाज कराने पर तीन दिन के कोर्स में ही इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है। उनका कहना है कि मलेरिया से सुरक्षा के लिए दवा का छिड़काव, पानी की निकासी के अलावा पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए। साथ ही खिड़की और दरवाजों पर जाली लगी हो ताकि मच्छर घर के अंदर प्रवेश न कर सकें। बुखार होने पर योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार कराएं।
अस्पताल में मलेरिया रोजाना आ रहे 30 मरीज
जिस तुलसी अस्पताल में मलेरिया से पीड़ित मंतसा का इलाज चल रहा है। यहां रोजाना 25 से 30 मलेरिया के मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि डेंगू के तीन से चार मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि, शहर के विनय विशाल अस्पताल और दीप अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि उनके यहां मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, वायरल से पीड़ित लोगों की तादाद काफी है। विनय विशाल अस्पताल में स्क्रब टाइफस के मरीज आने शुरू हो गए हैं। डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि उनके अस्पताल में मंगलवार को स्क्रब टाइफस के तीन मरीज पहुंचे हैं।