पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो पिछले करीब दो साल से मेयर पद के चुनाव की तैयारी कर रहे गौरव गोयल जिताऊ प्रत्याशी थे, ये फीड बैक पार्टी के पास था। लेकिन उसने गौरव की दावेदारी को नजरअंदाज किया। जबकि पार्टी हरिद्वार नगर निगम के मेयर पद पर हुए चुनाव की हार सबक पहले ले चुकी थी।
रुड़की में प्रत्याशी चयन के मामले में भाजपा ने अपनी गलती को दोहराया। जमीनी और जिताऊ कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर टिकट देने का खामियाजा पार्टी ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भुगता है। हालांकि मुख्यमंत्री इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि बगावत से प्रभावित यह पहला इस तरह का परिणाम है।
उनकी मानें तो भाजपा के अलावा कोई और राजनीतिक दल चुनाव में था ही नहीं। प्रदेश में भाजपा बहुत मजबूत है और आगे भी मजबूती का प्रदर्शन करती रहेगी। लेकिन प्रश्न यही है कि जिताऊ को नजरअंदाज करके जनाधार विहीन को टिकट दिए जाएंगे तो पार्टी कैसे मजबूती बनाए रखेगी? हरिद्वार में भाजपा बहुत सशक्त है।
वहां सांसद उसका है। 11 में से आठ विधायक उसके हैं। उनमें से एक को पार्टी बाहर कर चुकी है। रुड़की विधानसभा में भी भाजपा काबिज है। इतनी मजबूत होने के बावजूद उसकी पराजय स्तब्ध करने वाली तो है ही। हरिद्वार और रुड़की नगर निगमों के चुनाव में भाजपा की हार के बाद अब ये प्रश्न मौजूद है कि क्या हरिद्वार में ‘कमल’ जीत की गारंटी है?
रुड़की नगर निगम के मेयर पद पर पार्टी की पराजय की समीक्षा होगी। इस चुनाव में मेयर और पार्षद पद पर कई बागी चुनाव लड़े। उनके चुनाव मैदान में होने से पार्टी को नुकसान हुआ।
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा