विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर रुड़की के लाल ने न सिर्फ उत्तराखंड का बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। रुड़की आने पर भाजपाइयों ने अंकुर के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया।
सुभाष नगर में रविवार देर शाम आयोजित कार्यक्रम में भाजपा ओबीसी मोर्चे के जिलाध्यक्ष अनिल सैनी ने सुभाष नगर निवासी अंकुर रावत का स्वागत किया। इस अवसर पर अंकुर ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान भारतीय सेना की नई दिल्ली शाखा में तैनात अंकुर ने बताया कि वर्ष 2015 में सेना की ओर से उन्हें पर्वतारोही दल में शामिल किया गया था। लेकिन नेपाल में आए भूकंप की वजह से उन्हें आधे रास्ते से लौटना पड़ा।
दोबारा चयन होने पर 30 मार्च 2016 को वह दिल्ली से रवाना हुए थे। उसके बाद काठमांडू होते हुए एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचे। 19 मई को वह एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचे और तिरंगा लहराया। अंकुर ने कहा कि बचपन से ही उसे एडवेंचर का शौक है यही वजह है कि वह सेना में शामिल हुए। सम्मान समारोह में पूर्व राज्यमंत्री श्यामवीर सैनी, मोर्चा के जिला महामंत्री संजीव तोमर, नारायण सिंह, कमला बमोला, सूर्यकांत सैनी, धर्मेंद्र पुंडीर आदि उपस्थित रहे।
आठ हजार मीटर के बाद आक्सीजन नहीं
अंकुर ने बताया कि माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है। जबकि आठ हजार मीटर ऊंचाई के बाद आक्सीजन का अभाव रहता है। इसके लिए पर्वतारोही अपने साथ तीन आक्सीजन के सिलेंडर ले जाते हैं। जिसका वजन 20 किलोग्राम से अधिक होता है। इसके अलावा खाने के लिए ड्राईफ्रूट, चाकलेट आदि भी ले जाते हैं। आठ हजार मीटर से ऊपर आक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता होती है। ऐसे में पर्वतारोहियों के लिए एवरेस्ट की चोटी फतह करना कितना मुश्किल है इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।