दोनों भूस्खलन जोन के उपचार के साथ हाईवे का चौड़ीकरण होगा
वहीं, अब गंगोत्री हाईवे पर सक्रिय दो बड़े भूस्खलन जोन रतूड़ीसेरा और बंदरकोट में भी इसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। दोनों भूस्खलन जोन के उपचार के साथ हाईवे का चौड़ीकरण होगा। रतूड़ीसेरा में जहां इस काम पर 19.8 करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, बंदरकोट में 9.3 करोड़ की लागत से यह काम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों जगह चल रहे काम को मार्च 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिलक्यारा सुरंग में भी काम आ रही तकनीक
बीते वर्ष सिलक्यारा सुरंग में हुए भूस्खलन के मलबे को हटाने के लिए भी इसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। मलबे को रॉक बोल्ट तकनीक से स्थिर करने के बाद मशीनों से निकासी सुरंगें बनाई जा चुकी है। अभी तक तीन में दो सुरंगें बनाई जा चुकी हैं। बता दें कि भूस्खलन के दौरान सिलक्यारा सुरंग में आया मलबा 65 मीटर दायरे में फैल गया था।
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पहाड़ में भूस्खलन की रोकथाम के लिए रॉक बोल्ट तकनीक कारगर है। यह एक ऑस्ट्रेलियन तकनीक है, जिसमें भूस्खलन के लूज मलबे को हटाकर मिट्टी होने पर सॉयल नेलिंग और चट्टान में रॉक बोल्टिंग की जाती है। -विवेक श्रीवास्तव, कमांडर बीआरओ।