राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की बैठक 23 दिसंबर को होगी, जिसमें रोडवेज बसों के किराए में बढ़ोतरी पर मुहर लग सकती है। परिवहन विभाग सूत्रों के अनुसार, राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में परिवहन निगम की बसों के साथ ही व्यावसायिक वाहनों के किराए का निर्धारण के साथ ही भारत-नेपाल के बीच बस सेवा के लिए परमिटों का आवेदन पत्राें पर विचार किया जा सकता है। इससे पहले एसटीए की बैठक चार बार निरस्त की जा चुकी है। एसटीए की बैठक को लेकर विभागीय अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक लंबे समय बाद की जा रही है। अंतिम बैठक अगस्त 2017 में बुलाई गई थी। इसके बाद बैठक कई बार बुलाई गई लेकिन कतिपय कारणों के चलते आयोजित नहीं की जा सकी। नवंबर में बैठक होनी थी लेकिन सचिव परिवहन के मौजूद नहीं होने की वजह से बैठक को फिलहाल टाल दिया गया, लेकिन अब जबकि सचिव परिवहन एक माह के प्रशिक्षण के बाद लौट आए है तो बैठक होने की पूरी उम्मीद है।
बैठक न होने से सबसे अधिक नुकसान परिवहन निगम को हो रहा है। निगम किराया वृद्धि का प्रस्ताव परिवहन प्राधिकरण को बहुत पहले दे चुका है लेकिन बैठक नहीं होने से परिवहन निगम को भारी घाटे में बसें संचालित करनी पड़ रही हैं। इसके अलावा ट्रकों जैसे व्यावसायिक वाहनों के किराए में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। तेल कीमतों के बढ़ने की वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन किराया बढ़ाने की मांग लंबे समय से कर रही हैं। किराया निर्धारण करने को लेकर गठित समिति भी अपनी संस्तुति एसटीए को दे चुकी है।
परिवहन निगम द्वारा पर्वतीय मार्गों पर व्हील बेस बढ़ाने का निर्णय भी इसी बैठक में लिया जाना प्रस्तावित है। उत्तराखंड से नेपाल के लिए चलने वाली बस सेवा के लिए परमिट भी एसटीए से अनुमोदित होंगे। इसके बाद यह प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा।