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पर्वतीय क्षेत्रों में आने-जाने के लिए बनेंगे रास्ते

Thu, 11 Feb 2016 03:39 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आने-जाने की तकलीफ झेल रहे लोगों को थोड़ी राहत मिलने वाली है।
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शासन ने प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 90 सड़कें और 30 पुल बनाए जाने के लिए 44 करोड़ रुपये बजट लोक निर्माण विभाग को दे दिया है। सबसे अधिक 27 सड़कें और 15 पुल धारचूला क्षेत्र में बनेंगे। बाढ़-बारिश में यहां कई स्थानों की सड़कें और पुल लापता हो गए थे।

प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में आपदा के दौरान सड़कें और पुल बह जाने की शिकायतें लंबे समय से शासन में पड़ी थीं। अब इसके लिए बजट पास कर दिया है। 90 सड़कों की कुल लंबाई 509 किमी है। सबसे अधिक धारचूला में 127 किमी सड़क बनेगी। शासन ने यहां 15 पुलों के लिए 44 करोड़ रुपये में से 9 करोड़ 7 लाख रुपये बजट पास कर दिया है।
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धारचूला के बाद रानीखेत में 137.50 किमी लंबी 14 सड़कें पास की गई हैं। रामनगर, रुद्रपुर, अल्मोड़ा, कर्णप्रयाग में एक-एक सड़क पास की गई है। धारचूला के अलावा गंगोलीघाट,, डीडीहाट, चंपावत, नैनीताल, बागेश्वर,, द्वारहाट में पुल बनेगा।

शासनादेश में कहा गया है कि अगर इन क्षेत्रों में कहीं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत कोई कार्य पहले से स्वीकृत है तो वहां के लिए यह स्वीकृति निरस्त मानी जाएगी। विभाग से 31 मार्च तक पास की गई धनराशि व्यय करने के लिए कहा गया है।

सालभर बाद घट जाएगा 70 किमी का फासला
चंपावत में सड़क किस तरह किसी इलाके की रंगत बदल सकती है, इसे लधिया घाटी के लोगों से बेहतर कौन जानता है। बेशक यह अभी आगाज है। टांण से धुरा तक का मोटर मार्ग लधिया घाटी से लेकर आसपास के गांवों के लिए नई सुबह की तरह है।

फरवरी 2017 तक यह रोड पूरी हो जाएगी। 70 किलोमीटर दूरी कम होने से यहां के लोगों का न केवल फासला कम होगा, बल्कि असुविधा कम होने से लेकर आर्थिक लाभ भी होगा। इस पूरे ग्रामीण क्षेत्र के रोजमर्रा के खर्चों में ही 30 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी। भवन आदि निर्माण लागत भी कम होगी। श्रीरीठा साहिब गुरुद्वारे के तीर्थयात्रियों के लिए भी यह रोड उनकी धर्मयात्रा को सुखद बनाएगी।

श्रीरीठा साहिब से टनकपुर तक का सफर वर्तमान में 150 किलोमीटर का है, लेकिन फरवरी 2017 से श्रीरीठा साहिब से टनकपुर का फासला मात्र 80 किलोमीटर रह जाएगा। श्रीरीठा साहिब से ये सफर टांण, डांडा, सकुनी, बुड़म, मथियाबांज, धुरा होते हुए टनकपुर पहुंचेगा।

इस वक्त टनकपुर से यहां एक ट्रक का ढुलान करीब 5 हजार रुपया पड़ता है, जो इस रोड से 2700 रुपये हो जाएगा, इससे सरिया, सीमेंट, ईट जैसी निर्माण सामग्री ही नहीं, रोजमर्रा का सामान भी 30 प्रतिशत सस्ता होगा। वहीं हर साल करीब छह लाख सिख तीर्थयात्री टनकपुर होते हुए श्रीरीठा साहिब के गुरुद्वारे पहुंचते हैं। इस रूट से उनकी एक तरफ की दूरी 150 से कम होकर 74 किमी रह जाएगी।

सूखीढांग से धुरा के अलावा श्रीरीठा साहिब से टांण तक की 20 किलोमीटर की रोड पीएमजीएसवाई से पहले ही कट चुकी है। अब टांण से धुरा तक 25 किलोमीटर रोड कटनी बाकी है। 720.8 लाख रुपये की लागत से कटिंग के इस काम को एक साल में पूरा कर लिया जाएगा।
- एपीएस बिष्ट, सहायक अभियंता, लोनिवि, टनकपुर

रोड से बदलेगा गांवों का चेहरा
यह रोड लधिया घाटी से लेकर दूरदराज टांण, डांडा, सकुनी, बुड़म, मथियाबांज आदि कई गांवों के लोगों के अच्छे दिन लाएगी। ऐसा यहां के लोगों का मानना है। व्यापारी जयदत्त जोशी, दीवान सिंह बिष्ट, प्रमोद बोहरा का कहना है कि रोड यहां के लोगों के लिए एक सपना था।

रोड से गांवों की स्वास्थ्य सेवा से लेकर शिक्षा व्यवस्था में बेहतरी आने की ग्रामीणों को उम्मीद बंधी है। ये पूरा इलाका अदरक, माल्टा, नींबू, संतरा, गलगल, गडेरी के उत्पादन के लिए मशहूर है। मिट्टी के मोल जाने वाले इन उत्पादों से ग्रामीणों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। वहीं गुलिया और तेजपात का भी खूब उत्पादन होता है।
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शुरू हुआ काम
श्रीरीठा साहिब में पाटी विकासखंड के टांण से धुरा की तरफ रोड कटिंग का काम विधिवत शुरू हो गया है। 30 किलोमीटर की इस रोड की कटिंग का उद्घाटन आईडब्ल्यूडीपी के अध्यक्ष खीमानंद गड़कोटी और जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी के प्रतिनिधि विशाल चंद ने किया। पंडित घनश्याम गड़कोटी ने पूजा-अर्चना कराई। इस मौके पर नरेंद्र नेगी, दिनेश सिंह, पूर्व प्रधान देवकी देवी, खीमानंद, केशव दत्त, त्रिलोचन पोखरिया आदि मौजूद थे।
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