विषम भौगोलिक परिस्थिति होने के कारण यहां बीआरओ की ओर से विदेशी तकनीकी सोयल स्टेबलाइजेशन के जरिए सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस तकनीक में सड़क पर तारकोल बिछाने के बजाय सीमेंट के साथ उसी स्थान की मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है।
सड़क पर गिट्टी (पत्थर) भी नहीं बिछाए जा रहे हैं। मशीन से सीमेंट और मिट्टी का घोल बिछाया जा रहा है। बीआरओ के अधिकारियों ने इस विधि को तारकोल से भी मजबूत होने का दावा किया है।
बीआरओ के कमांडर एसएस मक्कड़ का कहना है कि इस विधि से सड़क को मजबूती के साथ ही समय की बचत भी हो रही है। सीमा क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए सालभर में चार माह ही उपर्युक्त होते हैं।