ऋषिकेश की पावन गंगा तटभूमि पर फैले साधारण कंकर-पत्थर कोलकाता के कलाकार मानस की कूची ने जीवंत कलाकृतियों में बदले नजर आ रहे हैं। ये पत्थर आस्था, कला और संस्कृति की अनोखी कहानी बयां कर रहे हैं।
मां गंगा सच में जीवनदायिनी है। कोलकाता के कलाकार मानस ने इसे अपने हुनर से साबित कर दिया है। बचपन से कला के शौकीन मानस के लिए अब गंगा के पत्थर न सिर्फ प्रेरणा बने हैं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का जरिया भी हैं।
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करीब छह महीने पहले ऋषिकेश आए मानस मायाकुंड में किराए के मकान में रहते हैं। कैनवास पर रंग भरने वाले मानस को गंगा किनारे बिखरे पत्थरों में संभावनाएं दिखीं। उन्होंने इन पत्थरों को चुनकर उन पर तूलिका से देवी, देवताओं, प्रकृति और पर्यावरण की खूबसूरत कलाकृतियां उकेरनी शुरू कीं।
अपनी कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए मानस ने त्रिवेणी घाट को चुना। धीरे-धीरे उनकी अनूठी कलाकृतियों ने देसी, विदेशी पर्यटकों का ध्यान खींचा। अब 100 रुपये से एक हजार रुपये तक बिकने वाली ये कलाकृतियां मानस के हुनर को नई उड़ान दे रही हैं।
मानस ने बताया कि ऋषिकेश और मां गंगा ने उन्हें एक नई दिशा दी है। उनका यह सफर बताता है कि जुनून और मेहनत से किसी भी शौक को सफल आजीविका में बदला जा सकता है। गंगा के तट पर सजती उनकी कलाकृतियां अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं और उत्तराखंड की कला संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही हैं।