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ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना: प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भी सिस्टम सुस्त, 79 फाइल लटकी

Sun, 18 Jul 2021 10:13 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून

सार

प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाने की मांग को लेकर रेलवे विकास निगम मुख्य सचिव से लेकर सचिवों तक को लगातार पत्र लिख रहा है। लेकिन अभी तक प्रस्तावों पर मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेललाइन की परियोजना पर सरकारी सिस्टम सुस्त है। रेलवे विकास निगम को यह परियोजना 2024-25 तक पूरी करनी है, लेकिन महीनों बाद भी खनन विभाग से क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट और मिट्टी उठान की मंजूरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे करीब 79 प्रस्ताव शासन में मंजूरी के लिए लटके हैं। प्रस्तावों को समय पर मंजूरी न मिलने से मुख्य सुरंगों का कार्य बेहद धीमा हो गया है। 

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प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाने की मांग को लेकर रेलवे विकास निगम मुख्य सचिव से लेकर सचिवों तक को लगातार पत्र लिख रहा है। लेकिन अभी तक प्रस्तावों पर मंजूरी नहीं मिल पाई है। रेल मंत्री से परियोजना की गति में तेजी लाने का वादा कर दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर खनन प्रस्तावों की मंजूरी का अब सारा दारोमदार आ गया है।

करीब 16 हजार करोड़ रुपये लागत की यह परियोजना सामरिक और राष्ट्रीय महत्व की दृष्टि से बहुत अहम है। प्रधानमंत्री कार्यालय परियोजना की मॉनिटरिंग कर रहा है। 125 किमी लंबी परियोजना के तहत 17 मुख्य सुरंगों का निर्माण होना है। सुरक्षा सुरंगों को शामिल करते हुए करीब 200 किमी की सुरंगों पर ही काम होना है।
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इन सुरंगों के निर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता का करीब दो करोड़ टन एग्रीगेट( बजरी) चाहिए। इसके लिए त्रिवेंद्र सरकार में खनन नीति में राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के लिए अलग से संशोधन भी किए गए। लेकिन संशोधित नीति के तहत हाईपावर कमेटी की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी औद्योगिक विकास विभाग के स्तर से अब तक प्रस्ताव लटके हैं।

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मार्च में पूरी हो गई थी प्रक्रिया

परियोजना के लिए बैचिंग प्लांट, क्रशर प्लांट, स्क्रीनिगं प्लांट, परियोजना की भूमि से मिट्टी के उठान की अनुमति देने के लिए जनवरी महीने में नीति में संशोधन हो गए थे। नीति के तहत गठित हाईपावर कमेटी ने 22 से 25 मार्च के बीच परियोजना स्थल का दौरा किया। उसके बाद 79 प्रस्तावों को तैयार कर शासन को भेजा।

किसके कितने प्रस्ताव           
प्लांट    -      प्रस्ताव  -शासन में    -लंबित
बैचिंग प्लांट    33      26         07
क्रशर प्लांट    15      10         -05
स्क्रीनिंग प्लांट  01      01       -
मिट्टी का इस्तेमाल (ठेकेदार)    20      14         06
मिट्टी का इस्तेमाल (निगम)    10       06          04        
कुल योग    79      57          22

पीएम के सलाहकार खुल्बे भी लिख चुके हैं पत्र
प्रधानमंत्री कार्यालय भी परियोजना निर्माण तेजी लाने के लिए मुख्य सचिव कार्यालय को पत्र लिख चुका है। पीएम के सलाहकार भाष्कर खुल्बे ने प्रदेश सरकार को परियोजना के कार्य में तेजी लाने और रेल विकास निगम को सहयोग करने को कहा।

ऋषिकेश कर्णप्रयाग परियोजना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं दिल्ली से लौटा हूं। मैंने केंद्रीय रेल मंत्री से परियोजना की प्रगति पर उनसे चर्चा हुई। परियोजना की गति में तेजी लाने के लिए सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। शासन में परियोजना के जो भी प्रस्ताव हैं, उनके बारे में जल्द रिपोर्ट लूंगा। उन्हें मंजूरी दी जाएगी।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

शासन में विभाग से प्रस्ताव काफी देरी से प्राप्त हुए। करीब 80 फाइलें हैं। चूंकि औद्योगिक विकास विभाग मुख्यमंत्री देखते हैं, इसलिए फाइल पर उनका अनुमोदन लिया जाना था। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी के स्तर पर एक फाइल कर दी गई थी। जल्द प्रस्ताव मुख्यमंत्री जी के समक्ष रखे जाएंगे। हमारा भी पूरा प्रयास है कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के प्रस्तावों पर तेजी से अमल हो।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव औद्योगिक विकास(खनन)
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