फिर उन्होंने डूब रहे पर्यटक को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। पर्यटक को पकड़कर उसे किनारे ले आए। इस दौरान पर्यटक बेसुध हो गया था। उन्होंने पर्यटक को सीपीआर दिया, लेकिन उसका एयरवेज ब्लॉक (फेफड़ों तक हवा पहुंचने वाले रास्ते में रुकावट) हो गए थे।
उन्होंने पर्यटक के मुंह में हाथ डालकर उसका एयरवेज खोलने का प्रयास किया। फिर उन्होंने टीम के सदस्यों को सीपीआर देने के लिए कहा। करीब 15 मिनट तक सीपीआर देने और एयरवेज खुलने के बाद पर्यटक की सांसें चलने लगीं। इसके बाद उन्होंने 108 आपातकालीन सेवा को फोन किया। करीब 40 से 45 मिनट बाद पर्यटक की हालत सामान्य हो गई। 108 पहुंचने के बाद पर्यटक स्वयं वाहन में बैठकर अस्पताल की ओर रवाना हो गया।
दोस्त को बचा लिया, खुद पानी में बहने लगा
थाना मुनि की रेती प्रभारी प्रदीप चौहान ने बताया कि अविनाश अपने पांच दोस्तों के साथ शिवपुरी यूसुफ बीच पर घूमने गया था। गंगा में आचमन के दौरान एक दोस्त की चप्पल गंगा में बहने लगी। चप्पल को पकड़ने के लिए युवक जैसे ही आगे बढ़ा, वैसे ही वह गंगा के तेज बहाव में बहने लगा। दोस्त को गंगा में बहते देख अविनाश उसे बचाने के लिए गंगा में उतर गया। कड़ी मशक्कत के बाद पहला दोस्त तो बच गया, लेकिन अविनाश गंगा के तेज बहाव में डूबने लगा, जिसे बाद में गाइडों की मदद से मशक्कत के बाद बचाया गया।
गंगा में रीवर गाइड न केवल पर्यटकों को रोमांच का अनुभव कराते हैं, बल्कि उनकी जान भी बचाते हैं। ऐसे गाइडों को सम्मानित करना जरूरी है। पर्यटन विभाग और रोटेशन समिति को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
- दिनेश भट्ट, पूर्व अध्यक्ष गंगा नदी रीवर राफ्टिंग रोटेशन समिति
क्या कहते हैं चिकित्सक
अचेत (बेहोश) और सांस न ले रहे व्यक्ति के लिए सीपीआर जीवन रक्षक है, जो मस्तिष्क की क्षति को रोककर जीवित रहने की संभावना को दोगुना या तिगुना कर सकता है। हृदय गति रुकने की आशंका हो तो तत्काल सीपीआर शुरू कर देना चाहिए। दिमाग चार से पांच मिनट बिना ऑक्सीजन के रह सकता है। जितना प्रयास करेंगे जीवन की उतनी संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
- डॉ. अमित रौतेला, वरिष्ठ फिजिशियन, राजकीय उपजिला चिकित्सालय