आंकड़े बयां कर रहे मौन आपातकाल की हकीकत
डॉ. संतोष ने बताया कि युवाओं पर हुए शोध में स्पष्ट हुआ है कि देश के विश्वविद्यालय के छात्रों में अवसाद की दर 25 फीसदी तक पहुंच चुकी है। वहीं केंद्र सरकार के आंकड़ों (युवा मंत्रालय) के अनुसार, वर्ष 2018 से 2023 के बीच आईआईटी, एनआईटी और आईआईएम जैसे शीर्ष संस्थानों में 60 छात्रों ने आत्महत्या की। एम्स और अन्य मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों व रेजिडेंट्स के बीच यह आंकड़ा 120 तक पहुंच गया है। डॉ. संतोष कहते हैं कि जब तक शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक अपेक्षाएं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता में संतुलन नहीं बनाया जाएगा, तब तक यह संकट और गहराता जाएगा।
25 मार्च को एम्स में जुटेंगे प्रदेश भर के मेडिकल छात्र
एम्स में युवा जोश पहल के तहत नेशनल यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। 25 मार्च को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के मेडिकल छात्र शामिल होंगे। डॉ. संतोष ने बताया कि एम्स के सोशल आउटरीच सेल की ओर से आयोजित इस एकदिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में बढ़ती मानसिक और वित्तीय चुनौतियों का समाधान तलाशना है।