साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में 85 लाख से अधिक रुपये गंवा चुके दो पीड़ितों को अदालत से सोमवार को कुछ राहत मिली। कोर्ट ने एक पीड़ित के 10.35 लाख रुपये और दूसरे के 50 हजार रुपये उनके खातों में वापस देने के आदेश दिए। यह रकम साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत होने के बाद ठगों के विभिन्न खातों में होल्ड कर ली गई थी। अदालत ने संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है कि वे थाने की जांच रिपोर्ट के अनुसार बची हुई धनराशि को तत्काल पीड़ितों के बैंक खाते में वापस करें।
एक घटना नीरज सिंह रौथाण के साथ हुई थी। उन्होंने बीती 23 जुलाई को मुकदमा दर्ज कराया था। उनके खातों से कुल 48.12 लाख रुपये ठगे गए थे। उन्होंने धोखाधड़ी की शिकायत 1930 पर की थी। इसके बाद 10.35 लाख रुपये होल्ड हो गए लेकिन बाकी रकम साइबर ठगों ने अलग-अलग खातों के माध्यम से निकाल ली थी। अदालत ने प्रार्थी की याचिका पर धनराशि अवमुक्त करने का आदेश दिया। साथ ही अंडरटेकिंग ली कि भविष्य में यदि उस धनराशि के संबंध में विवाद हुआ तो प्रार्थी को वह राशि अदालत में जमा करनी होगी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम भावना पांडेय ने संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि वे थाने की आख्या में बताई गई धनराशि को प्रार्थी के खाते में भेज दें। एक अन्य मामले में प्रार्थी कुलदीप कुमार को राहत मिली। उन्होंने बीती 26 अप्रैल को एक कथित इन्वेस्टमेंट ग्रुप के झांसे में आकर 37.50 लाख ठगों के अलग-अलग खातों में जमा कर दिए थे, जिसमें से लगभग 50 हजार रुपये बचाए जा सके थे। यह राशि उनके खाते में वापस भेजने का आदेश हुआ है।