प्रसिद्ध पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा ने चारधाम सड़क परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में चोपड़ा ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों पर चौड़ीकरण कार्य में हिमालयी पारिस्थितिकी को दरकिनार करते हुए मनमर्जी से कटान कराने का आरोप लगाया है। जिससे कई सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी का गठन किया था, जिसमें रवि चोपड़ा की अध्यक्षता में 25 अन्य सदस्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट के महासचिव को सौंपे त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि एचपीसी नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा कर सकती है। त्यागपत्र में चोपड़ा ने शीर्ष अदालत के दिसंबर 2021 के आदेश का उल्लेख किया है, जिसमें एचपीसी की सिफारिश और सितंबर 2020 के अपने आदेश में सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापक सड़क रचना को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने सड़क चौड़ीकरण में पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर अपनी चिंता भी जाहिर की है। हाई पावर कमेटी ने चारधाम राजमार्ग परियोजना में सड़कों की चौड़ाई 5.5 मीटर तक सीमित रखने की संस्तुति की थी।
हालांकि, इस चौड़ाई को लेकर समिति के बीच हमेशा मतभेद की स्थिति रही। दूसरी तरफ सड़कों का चौड़ीकरण भी संस्तुति से भिन्न पहले ही 10 मीटर के आधार पर किया जा रहा है। हालांकि, 14 दिसंबर 2021 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सामरिक महत्व वाली बद्रीनाथ, गंगोत्री व पिथौरागढ़ राजमार्ग में सड़क की चौड़ाई 10 मीटर करने की अनुमति जारी कर दी थी। इस विवाद का यहीं पटाक्षेप होता दिख रहा था, लेकिन रवि चोपड़ा ने अब इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने खुलकर नाराजगी भी जाहिर की है।
चोपड़ा ने पत्र में लिखा कि इस निर्णय ने एचपीसी की भूमिका को केवल दो गैर-रक्षा सड़कों की देखरेख तक सीमित कर दिया गया है। वहीं, उन्होंने कहा कि एचपीसी की ओर से अतीत में किए गए निर्देशों और सिफारिशों को या तो अनदेखा कर दिया गया है या सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से देरी से प्रतिक्रिया दी गई है। चोपड़ा ने लिखा कि यह अनुभव इस विश्वास को प्रेरित नहीं करता है कि मंत्रालय की प्रतिक्रिया दो गैर-रक्षा सड़कों के संबंध में भी बहुत भिन्न होगी। उन्होंने लिखा कि न्यायालय ने गैर-रक्षा राजमार्गों को चौड़ा करने के लिए रिस्पांडर्स को कानूनी राहत लेने की भी अनुमति दी है। इन परिस्थितियों में उन्हें एचपीसी का नेतृत्व जारी रखने या वास्तव में इसका हिस्सा बनने का कोई उद्देश्य नहीं दिखता है।