सीधी भर्ती में आरक्षण रोस्टर बदलने पर उत्तराखंड एससी/एसटी इम्पलाइज फेडरेशन ने प्रदेश व्यापी सामाजिक आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। फेडरेशन का कहना है कि आगामी कैबिनेट बैठक में सरकार ने आरक्षण रोस्टर पर पुनर्विचार नहीं किया, तो एससी व एसटी वर्ग के लोग अपने हक के लिए सड़कों पर उतर कर आंदोलन करेंगे।
फेडरेशन ने एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट के आदेश और 2006 के शासनादेश के अनुसार विभिन्न विभागों में आरक्षण रोस्टर के आधार पर डीपीसी करने के आदेश जारी करने की मांग की है।
रविवार को प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान उत्तराखंड एससी/एसटी इम्पलाइज फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष करम राम ने कहा कि एससी/एसटी वर्ग के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है। पहले से पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था लागू थी, लेकिन वर्ष 2012 में इसे खत्म कर दिया। जिसके बाद फेडरेशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। नौ अगस्त 2019 को कोर्ट ने सरकार को 2006 के शासनादेश के अनुसार डीपीसी में आरक्षण रोस्टर लागू करने का आदेश दिया, लेकिन आज तक कार्मिक विभाग की ओर से इस आदेश के अनुपालन में आदेश जारी नहीं किया गया।
वहीं 28 अगस्त 2019 को कैबिनेट बैठक में सीधी भर्ती के लिए आरक्षण रोस्टर बदल कर अनुसूचित जाति का पद छठे क्रम से शुरू किया गया। जबकि पूर्व में यह पद पहले स्थान था। इस मौके पर कोषाध्यक्ष मटन लाल, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर, जिला अध्यक्ष शिव लाल गौतम, संरक्षक दिलीप चंद्र आर्य, जयपाल सिंह, मोहन लाल, राजीव कुमार, बलदेव शाह, रघुनाथ लाल आर्य आदि मौजूद रहे।
संख्या बल पर हक छीनने का प्रयास
फेडरेशन का कहना है कि उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन संख्या बल के आधार पर एससी/एसटी वर्ग का हक छीनने का प्रयास कर रहा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फेडरेशन अपने अधिकारियों के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार है। एसोसिएशन यह बताए कि एससी/एसटी को किस आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।