राज्य को है विशेष कानून बनाने का अधिकार
संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है। महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के मद्देनजर सरकार यदि कोई ऐसा कानून बनाती है, जिससे महिलाओं का उत्थान हो सके तो वह इस अनुच्छेद के तहत सांविधानिक माना जाएगा।
डोमेसाइल के आधार पर आरक्षण राज्य नहीं दे सकता
संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी। अनुच्छेद 16(3) कहता है कि राज्य के अधी
न किसी नियोजन या पद के सबंध में केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान, निवास या इनमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा न उससे विभेद किया जाएगा। राज्य डोमेसाइल के आधार पर आरक्षण नहीं दे सकता। यह कानून बनाने का अधिकार केवल संसद को है।
राज्य को आरक्षण देने का अधिकार नहीं
प्रदेश सरकार को डोमेसाइल के आधार पर आरक्षण देने का सांविधानिक अधिकार नहीं है। उत्तराखंड मूल की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाना संविधान के अनुच्छेद 14,16,19 और 21 के खिलाफ है।
- कार्तिकेय हरिगुप्ता (याचिकाकर्ता के अधिवक्ता)
सरकार को पहले भी लग चुके हैं झटके
प्रदेश सरकार को राज्य आंदोलनकारियों के 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण पर भी न्यायालय से झटका लग चुका है। कोर्ट ने आरक्षण वाले शासनादेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद ही खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण कोटा भी खत्म हुआ था।
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याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह उठाया मसला
उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य के लोकसेवा आयोग की प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा में उत्तराखंड मूल की महिलाओं को अनारक्षित श्रेणी में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। इस कारण वे परीक्षा से बाहर हो गईं।