जोशी ने कहा कि धरना स्थल पर मेडिकल टीम तैनात रहेगी। यह मेडिकल टीम कर्मचारियों का बुखार मापने के साथ उन्हें मास्क और सैनिटाइजर की सुविधा प्रदान करेगी। साथ ही उन कर्मचारियों को घर पर रहने की अपील की जाएगी जो जुकाम, सर्दी और खांसी से पीड़ित हैं। दूरदराज के गांवों में कर्मचारी अपने खर्च से ग्रामीणों को मास्क व सैनिटाइजर उपलब्ध कराएंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को हड़ताल से बाहर किया
जोशी ने कहा कि जन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एलोपैथिक डाक्टर, नर्सिंग एवं फार्मासिस्ट स्टाफ व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को बेमियादी हड़ताल से मुक्त रखा गया है। वे सोमवार से हड़ताल में शामिल हो रहे थे।
उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक विभाग के डाक्टर व अन्य स्टाफ हड़ताल में शामिल रहेंगे। हड़ताल के दौरान वे दो के स्थान पर अब ढाई घंटे कार्य बहिष्कार करेंगे। 25 मार्च को एसोसिएशन की हाई पावर संयोजक मंडल की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मंगलवार से वाहन चालक भी हड़ताल में
मंगलवार से राजकीय वाहन चालक महासंघ भी हड़ताल में पूरी तरह से शामिल हो जाएगा। ऊर्जा के तीनों निगम हड़ताल में शामिल हो चुके हैं। जल निगम और जल संस्थान के कर्मचारियों ने हड़ताल में भागीदारी शुरू कर दी है। रोडवेज के संगठनों से बातचीत चल रही है। जल्द निर्णय हो जाएगा।
प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ आंदोलनरत उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने आंदोलन के नेतृत्व की दूसरी और तीसरी पंक्ति तैयार कर ली है। एसोसिएशन को अंदेशा है कि कोरोना को लेकर राज्य में लागू उत्तराखंड महामारी रोग नियंत्रण कानून के तहत सरकार आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है।
ऐसी स्थिति में आंदोलन की गति को बनाए रखने के लिए सभी जिलों में वैकल्पिक नेतृत्व तैयार कर लिया गया है। शनिवार को प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए उत्तराखंड महामारी रोक नियंत्रण अधिनियम के लागू करने का अहम फैसला लिया। इस कानून के लागू होने पर भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी गई है।
जिलाधिकारी को अधिकार दिया गया है कि वे ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगाएं। इस बीच उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने अपनी बेमियादी हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। मौसम साफ रहा तो सोमवार को जनरल ओबीसी कर्मचारी परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर जुटेंगे। बारिश में वे सचिवालय के पास वेडिंग प्वाइंट में धरना देंगे।
एसोसिएशन के नेता उत्तराखंड महामारी रोग नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई को लेकर आशंकित है। उन्हें इस बात का खतरा भी सता रहा है कि भीड़भाड़ वाला कार्यक्रम बताकर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है।
इस संभावना के मद्देनजर एसोसिएशन ने सभी जिलों व प्रदेश मुख्यालय पर दूसरी और तीसरी पंक्ति के नेताओं की टीम तैयार की है। एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसांई का कहना है कि गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। एसोसिएशन की जिला इकाइयों ने दूसरी व तीसरी पंक्ति के नेताओं की टीम तैयार कर ली है। प्रदेश स्तर पर भी टीम बनाई जा रही है।
कर्मचारी जेल भर देंगे
उत्तराखंड कर्मचारी संयुक्त परिषद के कार्यकारी प्रांतीय महामंत्री अरुण पांडेय ने कहा कि सरकार ने यदि किसी भी कर्मचारी नेता को गिरफ्तार करने की कोशिश की तो पूरे प्रदेश में कर्मचारी जेल भरो आंदोलन छेड़ कर जेल भर देंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार ने आंदोलन को प्रभावित करने की कोशिश की तो कर्मचारी चुप नहीं बैठेगा।