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प्रमोशन में आरक्षण: उत्तराखंड में आज से बेमियादी हड़ताल पर जनरल-ओबीसी कर्मचारी, नो वर्क नो पे लागू

Mon, 02 Mar 2020 12:50 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दून समेत सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन भी करेंगे कर्मचारी
  • एक बार फिर एसोसिएशन नेताओं से बात कर सकती है सरकार
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता विफल होने के बाद जनरल ओबीसी कर्मचारी आज सोमवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। इसके साथ ही सभी जिला मुख्यालयों पर कर्मचारी प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ धरना प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

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वहीं उत्तराखंड सरकार ने आज सुबह नो वर्क नो पे का आदेश लागू दिया है। दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने यह प्रस्ताव गया था, जिसे आज पास कर दिया गया है। देहरादून में राज्य सचिवालय और विभागों व कार्यालयों के जनरल ओबीसी कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में एकत्र होकर प्रदर्शन किया। तमाम राजकीय विभागों में आज से कामकाज ठप रहेगा। पुलिस और खुफिया विभाग अलर्ट मोड पर हैं। 

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आज देहरादून जिला समाज कल्याण विभाग में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग से आज कोई भी कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुआ। आपात सेवा होने की वजह से कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। कहा कि अगर पक्ष में फैसला नहीं आया तो आगामी पांच मार्च से आकस्मिक सेवाएं भी बाधित रखी जाएंगी। दून में मोहनी रोड स्थित पेयजल मुख्यालय में उत्तराखंड जल निगम सेवानिवृत्त कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने तालाबंदी की।

हल्द्वानी के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आरक्षण के विरोध में उत्तराखंड जनरल ओबीसी एंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्याें ने धरना दिया। रुद्रपुर आरटीओ कार्यालय के समीप पदोन्नति पर आरक्षण की रोक को लेकर सरकार की ओर से शासनादेश जारी नहीं करने पर उत्तराखंड जनरल-ओबीसी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। विकास भवन में कृषि कार्यालय भी खाली रहा। स्वजल लेखाकार कार्यालय में भी ताला लटका मिला। बागेश्वर में भी धरना प्रदर्शन जारी है।

प्रभावित हो सकती है विधानसभा की कार्यवाही

आंदोलन का नेतृत्व कर रही उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सभी जनरल ओबीसी कर्मचारियों से अपील की है कि वे अनिवार्य रूप से हड़ताल में शामिल हों। अपना विरोध दर्ज करने के लिए पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर के जनरल ओबीसी कर्मचारी शिक्षक सोमवार को विधानसभा का घेराव करने गैरसैंण के लिए कूच करेंगे। उनका वहां तीन मार्च को विधानसभा का घेराव करने का कार्यक्रम है।

उधर, बेमियादी हड़ताल पर प्रदेश सरकार फिलहाल चुप है। वह अब भी आंदोलित कर्मचारियों से हड़ताल न करने की अपील कर रही है। हालांकि शनिवार देर रात मुख्यमंत्री से हुई वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन सरकार बातचीत का सिलसिला बनाए रखना चाहती है। ऐसे संकेत हैं कि सोमवार को एसोसिएशन के नेताओं को फिर वार्ता के लिए बुलाया जा सकता है। हड़ताल टालने के लिए शासन के उच्चाधिकारी उनसे बातचीत कर सकते हैं।

जनरल ओबीसी कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। सचिवालय में 80 फीसदी कर्मचारी इसी वर्ग ताल्लुक रखते हैं। शून्यकाल में कार्यस्थगन के दौरान विपक्ष की सूचनाओं के जवाब तात्कालिक तौर पर तैयार कराने होते हैं। इसमें सचिवालय के समीक्षा अधिकारी से लेकर अनुभाग अधिकारी और अनुसचिवों की अहम भूमिका होती है।
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सरकार सदन में असहज हो सकती है

सूचनाओं के सटीक जवाब न मिलने पर सरकार सदन में असहज हो सकती है। प्रश्नकाल के दौरान भी उसे अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर देने में परेशानी हो सकती है। विधानसभा सचिवालय के सूत्र भी यह आशंका जता रहे हैं।

हमारी बार-बार गुजारिश के बाद भी सरकार ने प्रमोशन से रोक नहीं हटाई। सोमवार से प्रदेश के सभी जनरल ओबीसी कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। सरकार फिर भी नहीं मानी तो पांच मार्च से आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। इससे जो गंभीर हालात पैदा होंगे, उसकी सारी जवाबदेही प्रदेश सरकार की होगी।
- दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन

सरकार लगातार बातचीत कर रही है। हमारा मानना है कि बातचीत से ही समस्या का समाधान निकल सकता है। हड़ताल किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। तीन मार्च से बजट सत्र शुरू हो रहा है। ये प्रदेश के विकास से जुड़ा मसला है। मैं आशा करता हूं कि कर्मचारी हड़ताल के फैसले पर पुनर्विचार करेंगे।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार
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