आंदोलन का नेतृत्व कर रही उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने सभी जनरल ओबीसी कर्मचारियों से अपील की है कि वे अनिवार्य रूप से हड़ताल में शामिल हों। अपना विरोध दर्ज करने के लिए पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर के जनरल ओबीसी कर्मचारी शिक्षक सोमवार को विधानसभा का घेराव करने गैरसैंण के लिए कूच करेंगे। उनका वहां तीन मार्च को विधानसभा का घेराव करने का कार्यक्रम है।
उधर, बेमियादी हड़ताल पर प्रदेश सरकार फिलहाल चुप है। वह अब भी आंदोलित कर्मचारियों से हड़ताल न करने की अपील कर रही है। हालांकि शनिवार देर रात मुख्यमंत्री से हुई वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन सरकार बातचीत का सिलसिला बनाए रखना चाहती है। ऐसे संकेत हैं कि सोमवार को एसोसिएशन के नेताओं को फिर वार्ता के लिए बुलाया जा सकता है। हड़ताल टालने के लिए शासन के उच्चाधिकारी उनसे बातचीत कर सकते हैं।
जनरल ओबीसी कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल से विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। सचिवालय में 80 फीसदी कर्मचारी इसी वर्ग ताल्लुक रखते हैं। शून्यकाल में कार्यस्थगन के दौरान विपक्ष की सूचनाओं के जवाब तात्कालिक तौर पर तैयार कराने होते हैं। इसमें सचिवालय के समीक्षा अधिकारी से लेकर अनुभाग अधिकारी और अनुसचिवों की अहम भूमिका होती है।
सूचनाओं के सटीक जवाब न मिलने पर सरकार सदन में असहज हो सकती है। प्रश्नकाल के दौरान भी उसे अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर देने में परेशानी हो सकती है। विधानसभा सचिवालय के सूत्र भी यह आशंका जता रहे हैं।
हमारी बार-बार गुजारिश के बाद भी सरकार ने प्रमोशन से रोक नहीं हटाई। सोमवार से प्रदेश के सभी जनरल ओबीसी कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे। सरकार फिर भी नहीं मानी तो पांच मार्च से आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। इससे जो गंभीर हालात पैदा होंगे, उसकी सारी जवाबदेही प्रदेश सरकार की होगी।
- दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
सरकार लगातार बातचीत कर रही है। हमारा मानना है कि बातचीत से ही समस्या का समाधान निकल सकता है। हड़ताल किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। तीन मार्च से बजट सत्र शुरू हो रहा है। ये प्रदेश के विकास से जुड़ा मसला है। मैं आशा करता हूं कि कर्मचारी हड़ताल के फैसले पर पुनर्विचार करेंगे।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार