उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने मुख्य सचिव के पत्र का दो टूक जवाब दिया है कि जब तक सरकार प्रमोशन में लगी रोक को नहीं हटा लेती है, अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस लेना संभव नहीं है। एसोसिएशन ने कहा कि बेमियादी हड़ताल का फैसला कर्मचारियों की मांगों को लेकर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी सरकार ने प्रमोशन से रोक नहीं हटाई, इस कारण ये स्थिति पैदा हुई है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी और प्रदेश महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसांई ने मुख्य सचिव को संबोधित पत्र में लिखा कि दो मार्च से बेमियादी हड़ताल किसी मांग को पूरा कराने के समर्थन में नहीं है। ये हड़ताल सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कराने और इसके आलोक में प्रमोशन पर लगी रोक के आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर है।
पत्र में उन्होंने कहा, ‘जहां तक हड़ताल से बजट सत्र के प्रभावित होने से विकास योजनाओं और कर्मचारियों के वेतन देने पर विपरीत प्रभाव का प्रश्न है। तो ऐसा हमारा कोई उद्देश्य नहीं है। न ही विधानसभा सत्र को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
बोर्ड परीक्षाओं की डयूटी पर तैनात शिक्षकों को हड़ताल से अभी दूर रखने का फैसला लिया गया है। उन्होंने लिखा है कि इस आंदोलन में हम सिर्फ अपने सामाजिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए संघर्षरत हैं। जब तक पदोन्नति में लगी रोक को सरकार नहीं हटा लेती है तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल को वापस लेना संभव नहीं होगा।