सीएम हरीश रावत की मौजूदगी में लिया गया फैसला।
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राज्य के आपदा प्रभावित इलाकों के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। इन युवाओं के लिए होमगार्ड भर्ती में भी 10 फीसदी कोटा आरक्षित किया जाएगा। साथ ही सीमांत इलाकों के युवक-युवतियों को पुलिस भर्ती में भी लंबाई में कुछ छूट मिलेगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की मौजूदगी में हुई गृह विभाग की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों का पोस्टमार्टम भी अब मौके पर ही होगा और पर्वतीय व मैदानी इलाकों में निर्धारित प्रावधानों के विपरीत व्यावसायिक और आवासीय भवनों का निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अफसरों को निर्देश दिए कि पुलिस भर्ती में सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को निर्धारित न्यूनतम कद में छूट दी जानी है। इसके लिए पहले से निर्धारित मानकों को शिथिल करने की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाए।
सीएम का मानना था कि इन क्षेत्रों के युवा नौकरी में शामिल होंगे तो पलायन पर अंकुश लगेगा। फिर आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराना भी जरूरी है, लिहाजा होमगार्ड में 10 प्रतिशत भर्तियां इन इलाकों के युवाओं से किया जाना सुनिश्चित करें।
आपदा में मृतकों का मौके पर ही होगा पोस्टमार्टम
आपदा
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प्राक़ृतिक आपदाओं के दौरान मारे गए लोगों का अब मौके पर ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा। गृह सचिव विनोद शर्मा ने सभी डीएम, एसएसपी को निर्देशित किया है कि आपदा में मारे गए लोगों का डॉक्टरों की टीम मौके पर ही भेजकर पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि पीड़ित परिजनों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। बता दें कि पिछले माह पिथौरागढ़ और चमोली में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान 30 से अधिक लोगों की मौत के बाद पुलिस प्रशासन व पीड़ित परिजनों को भारी मुसीबत उठानी पड़ी थी।
पुलिस मेस और जेल में मिलेंगे उत्तराखंडी व्यंजन
पुलिस मेस और राज्य के कारागारों में भोजन में अब उत्तराखंडी व्यंजन मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के स्कूलों के अलावा पुलिस समेत तमाम सरकारी विभागों में कारागार में निर्मित उत्पादों की खरीद प्राथमिकता से कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कारागार में कैदियों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।
अनाप शनाप तरीके से नहीं बन सकेंगे आशियाने
प्रावधानों के तहत बनेंगे भवन
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राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अब निर्धारित प्रावधानों के विपरीत व्यावसायिक और आवासीय भवनों का निर्माण नहीं किया जा सकेगा। एमडीडीए और आवास विभाग जैसी सरकारी एजेंसियों के अलावा आपदा प्रबंधन विभाग की ‘बिल्डिंग बाइलाज कमेटी’ भी इस पर सख्त नजर रखेगी। पर्वतीय इलाकों में भूकंप, अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी आपदाओं से होने वाली तबाही के दौरान जानमाल के भारी नुकसान को कम करने के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया।
गंगोत्री धाम का रास्ता अब होगा सुगम
गंगोत्री धाम का सफर अब सुरक्षित और सुगम हो जाएगा। धरासू उत्तरकाशी से गंगोत्री तक 124 किमी लंबा नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनाया जा रहा है। इस परियोजना के तहत भूस्खलन वाले क्षेत्रों में टनल और पेब्ड शोल्डर, गैबलियन वॉल आदि प्रस्तावित हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा न्यूनतम हो जाएगा। इसके लिए उत्तरकाशी के स्वारीघाट, नालू पानी, नेताला गर्म बाईपास आदि क्षेत्रों का सर्वे कर लिया गया है। परियोजना की डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी अमेरिकी कंपनी ए कॉम को सौंपी गई है।