घटा हिमपात, सूख रहे जलस्रोत
विशेषज्ञों के मुताबिक पहले जहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्याप्त हिमपात होता था, वहीं अब अपेक्षाकृत बर्फबारी कम हो गई है। हिमपात का देर से होना और जल्दी पिघल जाने से इसका असर जल धाराओं और नौलों पर पड़ रहा है। ये अब सालभर पानी देने के बजाय मौसमी होते जा रहे हैं।
बारिश का बदला स्वरूप
जलवायु परिवर्तन के चलते बारिश के स्वरूप में भी बदलाव देखा जा रहा है। बारिश के पैटर्न में कुछ वर्षा में भले ही बहुत अधिक गिरावट न आई हो, लेकिन इसका स्वरूप पहले के सापेक्ष अब बदल गया है। कम समय में अत्यधिक बारिश और लंबे सूखे दौर देखने को मिल रहे हैं। इससे भूस्खलन, मृदा अपरदन और फसलों के नुकसान की घटनाएं बढ़ी हैं।
औषधीय पौधे संकट में
जलवायु परिवर्तन के चलते मध्य हिमालय में पाए जाने वाले कई बहुमूल्य औषधीय पौधों पर भी इसका असर पड़ा है। जिससे कुटकी, अतीस, जटामासी, सालम पंजा और चिरायता जैसे औषधीय पौधों की संख्या और पुनर्जनन क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है। अत्यधिक दोहन और बदलती जलवायु ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।