उत्तराखंड में मतदान के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है। सत्ता पाने को बेसब्र भाजपा, तो कुर्सी बचाए रखने के लिए कांग्रेस की जद्दोजहद ने सीटों के चुनावी समीकरणों को खासा पेचीदा बना दिया है। भाजपा के ‘जिताऊ चेहरे’ के फार्मूले में बागी और परिवारवाद का तोड़ कांग्रेस तलाश रही है। वहीं टिकट कटने से नाराज दोनों ही दलों के कई दावेदारों ने निर्दलीय मैदान में उतर कर पार्टियों की सियासी रणनीति पलट दी है। ऐसे में इस चुनाव से कई परिवारों, बागियों और दिग्गजों का भविष्य भी तय होगा।
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बिना सीएम के चेहरे के उतरी भाजपा की कुछ सीटें कुर्सी दौड़ में शामिल उनके नेताओं चलते हॉट हो गई हैं, जबकि कुछ सीटों पर परिवारों की साख दांव पर लगी है। वहीं कुछ सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस से आए बागियों को लेकर पनपा गुबार टिकट बंटते ही बागावत की शक्ल में बाहर निकला आया है। राजनाथ सिंह के समधी नारायण सिंह राणा, पूर्व सीएम खंडूड़ी की बेटी ऋतु, यशपाल आर्य के बेटे संजीव और चौहान दंपत्ति की सीटें खुद में हॉट हैं। वहीं सियासी जानकारों की नजर उन सीटों पर भी है जहां भाजपा ने अपने सिटिंग विधायकों विजय बड़थ्वाल, तीरथ सिंह रावत, महावीर रांगड़ और चंद्रशेखर का टिकट काट ‘जिताऊ’ को उतारा गया है।
चौबट्टाखाल से नई पारी शुरू करने उतरे महाराज
इस विधानसभा से भाजपा के पोस्टर ब्वॉय में से एक सतपाल महाराज को विधायक तीरथ रावत का टिकट काट कर उतारा है। महाराज राष्ट्रीय राजनीति को छोड़ कर पहली बार विधानसभा की सियासत में उतरे हैं। जानकार उन्हें सीएम की रेस में मान रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस ने राजपाल बिष्ट को प्रत्याशी बनाया है, जिनके लिए कांग्रेस को यहां एक फायदा यह है कि टिकट कटने से नाराज भाजपाई कविंद्र बिष्ट निर्दलीय मैदान में हैं, जबकि तीरथ की भी नाराजगी है। परिसीमन से पहले महाराज की पत्नी अमृता रावत दो बार यहां से विधायक रही हैं। इस सीट पर बसपा से भारतेंदु और सपा से चंद्रमोहन और उक्रांद से सुबोध पोखरियाल भी रेस में है।
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- इस सीट पर 15 प्रत्याशी हैं मैदान, पांच निर्दलीय,
- कुल मतदाता 87992
दो दिग्गजों की कोटद्वार में भिड़ंत
हरक सिंह रावत
- फोटो : AmarUjala
इस सीट पर प्रदेश की सियासत के दो बड़े दिग्गज भाजपा से हरक सिंह रावत और कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह नेगी हैं। साल भर पहले हरक भी नेगी के साथ रावत सरकार की कैबिनेट का हिस्सा थे। मार्च 2016 की बगावत के बाद हरक ने भाजपा को दामन थामा तो पार्टी ने उन्हें नेगी से टक्कर लेने को उतारा है। नेगी अपनी घरेलू पिच पर हैं, जहां उन्होंने वर्ष 2012 में तत्कालीन भाजपा सीएम बीसी खंडूड़ी को मात दी थी। हरक यहां पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन बगल की सीट लैंसडौन से दो बार विधायक रहे हैं। हरक को राहत यह है कि उनको टिकट मिलने से बागी हुए शैलेंद्र रावत को कांग्रेस ने यमकेश्वर से उतार दिया है। पार्टी कैडर को साधना उनके सामने चुनौती है, जबकि नेगी को एंटी इनकम्बैंसी प्रभावित करेगी। इनके अलावा बसपा की रेनू अग्रवाल, सपा के राकेश वर्मा और उक्रांद के हरीश चंद्र द्विवेदी मैदान में हैं।
- इस सीट पर कुल प्रत्याशी 12 हैं, जिसमें पांच निर्दलीय
यमकेश्वर में टिकी है खंडूड़ी की साख
इस सीट पर कांग्रेस भाजपा की भिड़ंत से अधिक पूर्व सीएम खंडूड़ी और बागी शैलेंद्र सिंह रावत की टक्कर के तौर पर देखी जा रही है। पूर्व सीएम खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़ी भूषण को भाजपा ने सिटिंग विधायक विजय बड़थ्वाल का टिकट काट कर उतारा है। उधर, कोटद्वार में टिकट कटने से नाराज भाजपा के बागी पूर्व विधायक शैलेंद्र को कांग्रेस ने उतारा है। सिटिंग विधायक रावत का टिकट 2012 में खंडूड़ी को कोटद्वार से उतारे जाने के चलते भाजपा ने काटा था। रावत अब पुराना हिसाब किताब चुकता करने की कोशिश में हैं। हालांकि रेनू बिष्ट का निर्दलीय उतरना कांग्रेस के समीकरणों को प्रभावित करेगा। उधर, ऋतु के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि बड़थ्वाल ने निर्दलीय नामांकन वापस ले लिया। इस सीट पर बसपा से जगपाल सिंह नेगी और उक्रांद से शांति प्रसाद भट्ट भी मैदान में हैं।
- इस सीट पर 8 प्रत्याशी मैदान में हैं, दो निर्दलीय
- कुल मतदाता 83485
भट्ट की रानीखेत में चुनौती बरकार
ajay bhatt
- फोटो : amar ujala
इस सीट से भाजपा के प्रदेश और चुनाव समिति अध्यक्ष अजय भट्ट चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी करन महारा उनके खिलाफ मैदान में हैं। भाजपा के बागी प्रमोद नैनवाल निर्दलीय मैदान में हैं, हालांकि पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया है। वर्ष 2012 में भट्ट मात्र 78 वोट से महारा के खिलाफ जीते थे। इस बार नैनवाल की बगावत को पार पाने की चुनौती भी भट्ट के सामने है। भट्ट का बड़ा कद उनको कितना फायदा चुनाव में देता है यह भी अहम रहेगा। इस सीट पर बसपा के कृपाल राम आर्य और उक्रांद से प्रताप सिंह शाही भी मैदान में हैं।
- इस सीट पर 5 प्रत्याशी हैं, जिसमें एक निर्दलीय
- कुल मतदाता 78481
चौहान दंपत्ति की चकराता में परीक्षा
इस सीट पर राज्य गठन के बाद से कांग्रेस का कब्जा है। मंत्री प्रीतम सिंह इस सीट से 3 बार के विधायक है, जिनको हर बार चुनौती चौहान दंपत्ति से मिली है। इसी के चलते मुन्ना चौहान की पत्नी मधु को टिकट देना भाजपा की मजबूरी भी दिखी। मधु ने प्रीतम को बिना पार्टी सिंबल के एक बार इस सीट पर कांटे की टक्कर दी है। वहीं इस बार बसपा प्रत्याशी दौलत कुंवर का उतरना जातीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। प्रीतम को एंटी इनकम्बैंसी झेलनी पड़ेगी तो मधु को सामने उनके मजबूत गढ़ चकराता में घुसपैठ की चुनौती है।
- इस सीट पर 4 प्रत्याशी हैं, जिसमें एक निर्दलीय
- कुल मतदाता 99129
मुख्यमंत्री हरीश रावत किच्छा सीट से भी समर में हैं। ये सीट भी भाजपा के कब्जे वाली है। इस सीट पर राजेश शुक्ला विधायक हैं। मुख्यमंत्री के मैदान में उतरने से इस सीट पर तैयारी कर रहे कांग्रेसियों में शुरुआत में जो नाराजगी थी, वह अब उतनी मुखर नहीं है। इस सीट पर पार्टी की महासचिव शिल्पी अरोड़ा के बागी तेवर पर ठंडे पड़ चुके हैं। यहां सीएम की टक्कर में सात उम्मीदवार हैं। किच्छा सीट पर 119311 वोटर हैं। कांग्रेस यहां पर्वतीय, मैदानी, दलित व अल्पसंख्यक वोटों पर फोकस कर रही है।
धर्मपुर में मंत्री बनाम मेयर
लगातार दो चुनाव जीत चुके कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल के सामने मेयर विनोद चमोली को उतारकर भाजपा ने धर्मपुर के समर को बेहद दिलचस्प बना दिया है। दो हेवीवेट उम्मीदवारों के मैदान में होने से ये सीट हॉट हो गई है। इस सीट पर सबसे ज्यादा 19 उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। मगर असल मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही माना जा रहा है। करीब 182919 वोटों वाली इस सीट पर अल्पसंख्यक और पर्वतीय मूल का वोटर बड़ी संख्या में है।
नैनीताल में आर्य पुत्र की प्रतिष्ठा दांव पर
बेटे के राजनीतिक पुनर्वास की खातिर कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की प्रतिष्ठा नैनीताल सीट पर भी दांव पर मानी जा रही है। बेशक वह बाजपुर से दावेदारी कर रहे हैं। मगर भाजपा से उनके बेटे संजीव आर्य नैनीताल सीट से उम्मीदवारी कर रहे हैं। संजीव की टक्कर कांग्रेस विधायक सरिता आर्य से है। इस सीट पर पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। मैदान में कांग्रेस से बगावत कर मैदान में उतरे केएल आर्य की मौजूदगी ने कांग्रेस के लिए मुकाबला कड़ा बना दिया है। इस सुरक्षित सीट पर 1 लाख सात हजार से अधिक मतदाता हैं।
रोमांचकारी हो गई रामनगर की डगर
नैनीताल जनपद की रामनगर सीट पर मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार रंजीत रावत के मैदान में आने के बाद रामनगर सीट पर सियासत हॉट हो गई है। पारंपरिक सीट सल्ट को छोड़कर रामनगर में उतरे रंजीत को पहली जंग सीट पर उठे असंतोष को शांत करने की लड़नी पड़ी। उनका मुकाबला भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट से है। जन सरोकारों की लड़ाई लड़ रहे यूपीपी के प्रभात ध्यानी इस मुकाबले को तिकोना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस सीट पर कुल प्रत्याशी हैं और कांग्रेस का फोकस कैडर वोट के साथ अल्पसंख्यक व पर्वतीय मूल के वोटों पर ही। भाजपा भी कैडर वोट और पर्वतीय वोटों पर फोकस कर रही है। सीट पर करीब 1 लाख सात हजार वोटर हैं।