प्रदेश की बहुगुणा सरकार वर्ष भर सरकती ही रही। राजनीतिक झंझावातों से जूझती कांग्रेस सरकार का क्षेत्ररक्षण बेहद ढीला रहा। कई बड़े फैसले लिए और रोल बैक कर गई।
कोई ऐसा महीना नहीं गुजरा जब मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने का शोर ना मचा हो। कई बार ऐसे काम भी उच्च न्यायालय के आदेश पर करने पड़े जो दैनिक कार्यों की तरह किए जाते हैं। सरकार का इकबाल और हनक कई बार गायब दिखा।
आपदा के बाद भी असफल
विगत जून की दैवी आपदा के बाद काम करने के लिए सरकार के पास सबसे बड़ा मौका था। लेकिन सरकार पहले प्राधिकरण और बाद में समितियों के गठन में ही लगी रही।
दैवी आपदा के समय भी सरकार में इतनी राजनीति हुई कि आपदा प्रबंधन मंत्री को मंत्रालय से इस्तीफा देने की धमकी देनी पड़ी।
कोर्ट से भी लताड़
उच्च न्यायालय में तमाम बड़े कानूनी विशेषज्ञों के होते हुए भी सरकार को कई जनहित के मुद्दों पर हार झेलनी पड़ी। बड़े फैसले लेने के साथ ही रोल बैक का सिलसिला जारी रहा।
न्यायालय का डंडा चला तो निकाय व पंचायत के चुनाव कराने का फैसला हुआ। बगैर नीति बनाए सरकारी चीनी मिलों को पीपीपी मोड में देने के फैसले पर भी बैकफुट पर आना पड़ा।
दिखाने के नाम पर गैरसैंण व रायपुर में विधान भवन और रायपुर में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास ही खाते में है।
मामले जिन पर सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा
: कृषि मंत्री को विपक्ष के लाभ के पद को लेकर किए गए विरोध के बाद टीडीसी व उपनल के चेयरमैन की कुर्सी छोड़नी पड़ी: सरकारी चीनी मिलों को पीपीपी मोड में दिए जाने का फैसला भी विपक्ष के भारी विरोध के बाद वापस करना पड़ा: बीआरओ से सड़क वापस लेने के फैसले को भी वापस लेना पड़ा: डिप्टी लोकायुक्त पर शपथ का समय तय होने के बाद वापस लिया कार्यक्रम: देहरादून के एसएसपी बंगले पर पीछे हटी सरकार: टिहरी विस्थापितों के पट्टों का आवंटन निरस्त करना पड़ा: आपदा राहत कार्यों के लिए प्राधिकरण बनाने का निर्णय वापस हुआ: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में दागी अफसर की नियुक्ति निरस्त करनी पड़ी
इन मामलों में अदालत में मिले जोर के झटकें
: राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर मुंह की खाई: खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण पर हारी सरकार: नौकरी में स्थानीय युवाओं की उम्र सीमा बढ़ाने के फैसले पर भी शिकस्त
उच्च न्यायालय का डंडा चला तो हुआ निर्णय
: निकाय चुनावों को टालने की कोशिश पर हाईकोर्ट ने फेरा पानी: पंचायत चुनाव में भी उच्च न्यायालय ने लगाई फटकार: साल में दो बार डीजी हेल्थ की तैनाती के लिए भी हाईकोर्ट ने दिया आदेश: अवैध खनन को लेकर भी उच्च न्यायालय में देना पड़ा शपथ पत्र