बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बैठक में 22 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी मिली है। इनमें 16 करोड़ का प्रावधान बदरीनाथ, जबकि छह करोड़ का प्रावधान केदारनाथ मंदिर के लिए किया गया है।
150 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं
इनसे यहां पूजा खर्च, वैतनिक व्यय के साथ ही मंदिर परिसर में निर्माण, जीर्णोद्धार कार्य प्रस्तावित हैं।
बदरीनाथ तो ठीक, लेकिन आपदा का जख्म खाए केदारनाथ में यह कार्य कैसे कराए जाएंगे यह बड़ा सवाल है। क्योंकि इसके 150 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य नहीं हो सकता। न ही विशेषज्ञों के सलाह बगैर जीर्णोद्धार।
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समिति के बजट पर गौर करें तो टूट-फूट को ठीक करने के लिए तकरीबन 20 लाख रुपए का बजट है। वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल मलबे से छेड़-छाड़ न किए जाने की बात दोहरा चुके हैं।
निर्माण पर प्रतिबंध
भारतीय भू सर्वेक्षण ने भी अपनी रिपोर्ट में एक निश्चित दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध की बात की है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् अतुल भार्गव खुद बगैर विशेषज्ञ सलाह जीर्णोद्धार कार्य निषिद्ध होने की बात कहते हैं, ऐसे में मंदिर समिति किस तरह प्रस्तावित कार्यों को अंजाम देगी, किस तरह इस बजट का उपयोग करेगी, यह सवाल है।
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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि बजट में किसी नई योजना के लिए प्रावधान नहीं किया गया है।
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केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार पूर्व से तय है। बीते साल दोनों मंदिरों के लिए 25 करोड़ का बजट था, लेकिन पैसा पूरा न मिल पाने की वजह से कार्य पूरे नहीं हो पाए। छूटे कार्य ही वर्तमान बजट से पूरे किए जाएंगे।