पहले उपनल से नियुक्तियों पर विवादों में आ चुका उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय एक बार फिर अपने ताजा कारनामे की वजह से विवादों में है।
विवि के कुलपति की बेटी और उपकुलसचिव की पत्नी का एचएनबी मेडिकल विवि और कुलसचिव की पत्नी का यूटीयू में नियुक्ति का मामला विश्वविद्यालय के गले की फांस बन गया है। मामले में राजभवन और शासन ने विवि प्रशासन से जवाब तलब कर लिया है।
तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीके गर्ग की बेटी पूजा गर्ग की नियुक्ति एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी में शोध अधिकारी के पद पर करने के आदेश उपनल से जारी हुए। जिस वक्त आदेश हुए, उस समय प्रो. गर्ग के पास मेडिकल विवि के कुलपति का भी कार्यभार था।
इसी प्रकार, यूटीयू के उपकुलसचिव डा. एसपीएस रावत की पत्नी कमलेश नेगी की नियुक्ति भी उपनल के माध्यम से एचएनबी मेडिकल विवि में सिस्टम मैनेजर पद पर कर दी गई। तथ्य छिपाने के लिए पत्नी के नाम के आगे डा. रावत के बजाए उनके पिता का नाम लिखवाया गया।
तीसरा मामला, तकनीकी विवि के कुलसचिव प्रो. विजय जुयाल की पत्नी डा. दिव्या जुयाल की तकनीकी विवि में शोध अधिकारी के पद पर नियुक्ति का है। तीनों ही मामलों की शिकायत गुपचुप तरीके से राजभवन और शासन को कर दी गई। जैसे ही विवि को इसकी भनक लगी तो ज्वाइनिंग नहीं दिलाई गई। मामले में अब राजभवन ने लिखित पत्र भेजकर जवाब तलब किया है। वहीं तकनीकी शिक्षा सचिव ओमप्रकाश की ओर से भी विवि से जवाब मांगा गया है।
पहला मामला नहीं है
नियमों को दरकिनार कर विवि ने इससे पहलेे परीक्षा नियंत्रक पद पर एके शाह, असिस्टेंट रजिस्ट्रार पद पर एमएल बत्रा और असिस्टेंट एग्जाम कंट्रोलर पद पर अरुण कुमार शर्मा की सीधे उपनल से भर्ती की थी। इनमें से एके शाह और एमएल बत्रा ने तो ज्वाइन नहीं किया लेकिन अरुण कुमार अब भी इस पद पर काम कर रहे हैं। निवर्तमान तकनीकी शिक्षा सचिव आरके सुधांशु ने जवाब तलब भी किया था।
सरकार भी कम दोषी नहीं
तकनीकी विवि में इस तरह की नियुक्तियों के लिए सरकार भी कम दोषी नहीं है। दरअसल, विवि में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी है। यहां तमाम पदों पर आउटसोर्सिंग वाले लोग ही काम कर रहे हैं। कई बार शासन और सरकार से पद सृजित करने की मांग की तो 85 पद सृजित भी हुए थे लेकिन आज तक उन पर भर्ती प्रक्रिया अमल में नहीं आई। नतीजतन, विवि प्रशासन कमी को पूरा करने के बहाने इस तरह के कदम उठा रहा है।
यूटीयू और मेडिकल विवि की परिनियमावली नहीं बनी होने से दोनों जगह खाली पद भरने के लिए उपनल को पत्र भेजा गया था। अब इसमें मेरी बेटी का ही चयन हो गया, इसकी मुझे जानकारी नहीं थी। वह कहीं और काम कर रही है। प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूर्ण की गई थी।
- प्रो. पीके गर्ग, कुलपति, यूटीयू
प्रदेशभर में होने वाली तमाम भर्तियों में उपनल की यही प्रक्रिया अमल में लाई जाती है। मेरी पत्नी का चयन भी उसी नियमों के तहत किया गया है। जांच की जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी।
- डा. एसपीएस रावत, उपकुलसचिव, यूटीयू
विवि में इस वक्त 450 से अधिक शोधार्थी हैं, जिनके लिए कोई शोध अधिकारी नहीं है। इसके तहत उपनल के माध्यम से नियुक्ति की मांग की गई थी। नियुक्ति जरूर हुई थी लेकिन मेरी पत्नी ने ज्वाइन नहीं किया है। वर्तमान में उपनल भर्ती की कोई भी प्रक्रिया गतिमान नहीं है।
- प्रो. विजय जुयाल, कुलसचिव, यूटीयू एवं मेडिकल विवि
यूटीयू में संविदा का कुलसचिव बनाने की तैयारी
अभी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में अपनों की भर्ती का विवाद थमा भी नहीं है कि दूसरी ओर कांट्रेक्ट पर तैनात एसोसिएट प्रोफेसर को विवि में कुलसचिव बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मामले में शासन ने तकनीकी विवि से आख्या मांगी है।
तकनीकी विवि में लंबे समय से नियुक्तियां विवादों में रही हैं। पहले तीन पदों पर नियुक्ति के मामले के बाद हाल ही में अपनों को उपनल के माध्यम से भर्ती का मामला विवादों में है। इसके साथ ही शासन स्तर पर एक और नियुक्ति का मामला सामने आ रहा है।
तकनीकी विवि के संघटक टीएचडीसी कॉलेज में तैनात कैमिस्ट्री के एसोसिएट प्रोफेसर डा. चिनप्पा भास्कर को विवि में कुलसचिव बनाने की तैयारी चल रही है। यह उत्तराखंड तकनीकी विवि एक्ट, एआईसीटीई और यूजीसी के मानकों का उल्लंघन है।
एक्त के तहत इतने महत्वपूर्ण पद पर किसी भी कांट्रेक्चुअल एंप्लाई को भर्ती नहीं किया जा सकता है। इसी वजह से अभी तक विवि में जितने भी कुलसचिव रहे हैं, वह परमानेंट थे और किसी अन्य विभाग से यहां प्रतिनियुक्ति पर आए हुए थे।
कुलसचिव पद के लिए आवेदन आया था। हमने प्रस्ताव पर तकनीकी विवि से आख्या मांगी है। आख्या आने के बाद ही नियमों का पालन करते हुए निर्णय लिया जाएगा।
- ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा